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बेस्ट जिंदगी शायरी दो लाइन हिंदी में 2022

बेस्ट जिंदगी शायरी दो लाइन हिंदी में 2022 Zindagi Shayari 2 Line Hindi Mein सिर्फ सांसे चलते रहने को ही ज़िन्दगी नही कहते आँखों में कुछ ख़वाब और दिल में उम्मीदे होना जरूरी है! 

जिंदगी शायरी दो लाइन हिंदी में

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एक साँस सबके हिस्से से हर पल घट जाती है, कोई जी लेता है जिंदगी, किसी की कट जाती है।

कंधे पर बैग आज भी है बस फर्क इतना है , कि पहले किताबें लेकर घूमता था और आज जिम्मेदारियां लेकर घूमता हूं। देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से, चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से।

ज़िन्दगी तुझसे हर एक साँस पे समझौता करूँ, शौक़ जीने का है मुझको मगर इतना तो नहीं, रूह को दर्द मिला… दर्द को आँखें न मिली, तुझको महसूस किया है तुझे देखा तो नहीं।

आहिस्ता चल ऐ ज़िंदगी कुछ क़र्ज़ चुकाने बाकी हैं, कुछ दर्द मिटाने बाकी हैं कुछ फ़र्ज़ निभाने बाकी हैं।

ज़िन्दगी दरस्त-ए-ग़म थी और कुछ नहीं, ये मेरा ही हौंसला है की दरम्यां से गुज़र गया।

देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से, चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से।

  जो पढ़ा है उसे जीना ही नहीं है मुमकिन, ज़िंदगी को मैं किताबों से अलग रखता हूँ।

कभी आँखों पे कभी सर पे बिठाए रखना, ज़िंदगी नागवार सही दिल से लगाए रखना।

क्या लिखूं हकीकत-इ-दिल आरज़ू बेहोश है, खत पर आंसू बह रहे हैं कलम खामोश है.

समंदर न सही पर एक नदी तो होनी चाहिए तेरे शहर में ज़िंदगी कहीं तो होनी चाहिए।

एक साँस सबके हिस्से से हर पल घट जाती है कोई जी लेता है जिंदगी किसी की कट जाती है।

आया ही था खयाल कि आँखें छलक पड़ीं आँसू किसी की याद के कितने करीब हैं!

इक टूटी सी ज़िंदगी को समेटने की चाहत थी न खबर थी उन टुकड़ों को ही बिखेर बैठेंगे हम।

देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से।

सिर्फ सांसे चलते रहने को ही ज़िन्दगी नही कहते आँखों में कुछ ख़वाब और दिल में उम्मीदे होना जरूरी है!

फिक्र है सबको खुद को सही साबित करने की जैसे ये ज़िंदगीए ज़िंदगी नही कोई इल्जाम है!

मुझ से नाराज़ है तो छोड़ दे तन्हा मुझको ऐ ज़िंदगीए मुझे रोज रोज तमाशा न बनाया कर।

नजरिया बदल के देख, हर तरफ नजराने मिलेंगे, ऐ ज़िन्दगी यहाँ तेरी तकलीफों के भी दीवाने मिलेंगे।

जब भी सुलझाना चाहा ज़िन्दगी के सवालों को मैंने, हर एक सवाल में ज़िन्दगी मेरी उलझती चली गई।

यूँ ही खत्म हो जायेगा जाम की तरह जिन्दगी का सफ़र, कड़वा ही सही एक बार तो नशे में होकर पिया जाये।

पानी फेर दो इन पन्नों पर ताकि धुल जाए स्याही सारी, ज़िन्दगी फिर से लिखने का मन होता है कभी-कभी।

कुछ इस तरह से गुज़ारी है ज़िन्दगी जैसे, तमाम उम्र किसी दूसरे के घर में रहा।

ज़िन्दगी लोग जिसे मरहम-ए-ग़म जानते हैं, जिस तरह हम ने गुज़ारी है वो हम जानते हैं।

जो तेरी चाह में गुजरी वही ज़िन्दगी थी बस, उसके बाद तो बस ज़िन्दगी ने गुजारा है मुझे।

नफरत सी होने लगी है इस सफ़र से अब, ज़िन्दगी कहीं तो पहुँचा दे खत्म होने से पहले।

छोड़ ये बात कि मिले ज़ख़्म कहाँ से मुझको, ज़िन्दगी इतना बता कितना सफर बाकी है।

जो लम्हा साथ है उसे जी भर के जी लेना, ये कम्बख्त ज़िन्दगी भरोसे के काबिल नहीं है।