तुम_मेरे_लिए_क्या_हो_शायरी

तुम मेरे लिए क्या हो शायरी | Tum Mere Liye Kya Ho Shayari

तुम मेरे लिए क्या हो शायरी

“तुम मेरे लिए बड़ी बेपरवाह सी हो गई है
ख़ुशियाँ आजकल,कब आयें …. कब चली जाएँ पता ही नही चलता..!”

डालना अपने हाथों से कफन मेरी लाश पर….!
की तेरे दिए जखमों के तोहफे कोई और ना देख ले…..!!!

मुझे कुछ अफ़सोस नहीं के मेरे पास सब कुछ होना चाहिए था,,,
मै उस वक़्त भी मुस्कुराता था जब मुझे रोना चाहिए था…!!!

यूँ ही अपने होंठों को झूठी हंसी से ‘संभाल लेता हूँ।।
अंदर से कितना टूटा हूँ बस खुद पे ‘पर्दा डाल लेता हूँ।

मेरे दिल ने जब भी कभी कोई दुआ माँगी है;
हर दुआ में बस तेरी ही वफ़ा माँगी है;
जिस प्यार को देख कर जलते हैं यह दुनिया वाले;
तेरी मोहब्बत करने की बस वो एक अदा माँगी है।

तुम को तो जान से प्यारा बना लिया;
दिल को सुकून आँख का तारा का बना लिया;
अब तुम साथ दो या ना दो तुम्हारी मर्ज़ी;
हम ने तो तुम्हें ज़िन्दगी का सहारा बना लिया।

न आज लुत्फ़ कर इतना कि कल गुज़र न सके;
वह रात जो कि तेरे गेसुओं की रात नहीं;
यह आरजू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम;
विसाले यार फकत आरजू की बात नहीं।

साथ अगर दोगे तो मुस्कुराएंगे ज़रूर;
प्यार अगर दिल से करोगे तो निभाएंगे ज़रूर;
कितने भी काँटे क्यों ना हों राहों में;
आवाज़ अगर दिल से दोगे तो आएंगे ज़रूर।