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20+ ईमानदार सरपंच के लिए शायरी Sarpanch Shayari

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ईमानदार सरपंच के लिए शायरी

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खोटा सिक्का जो समझते थे मुझे
आज मैं उनका ध्यान तोड़ आया हूँ,
जिंदगी की राहों में सफ़र लम्बा था मेरा
इसलिए क़दमों के निशान छोड़ आया हूँ।

इमानदारी से बेहतर माहौल नहीं
जिनकी सच्चाई का कोई मोल नहीं
चुनाव होता है विकास का जरिया
अरे बेईमानों यह कोई मखोल नहीं

सूरज की तपिश और बेमौसम बरसात को हमने हंस कर झेला है,
मुसीबतों से भरे दलदल में हमने अपनी जिंदगी को धंस कर ठेला है,
यूँ ही नहीं कदम चूम रही है सफलता आज इस खुले आसमान तले
ज़माने भर के नामों को पीछे छोड़ा है तब जाकर हमारा नाम फैला है।

जो बोला सत्य तो हड़कंप जैसे, मच गया देखो
जला इक दीप तो आंतक जैसे, मच गया देखो
सभी बेईमान हैं हैराँ, हुआ क्या है शहर भर को
कि ………भाई सा इक संत कैसे, जँच गया देखो।

घिर चुका था जब मुसीबतों के बीच
हौसला बढाया तो रुकावटों की ईमारत हिल ही गयी,
बहुत दूर नजर आ रही थी जो इक दिन
कदम बढाया तो आज मंजिल मिल ही गयी।

ज़िन्दगी हसीं है ज़िन्दगी से प्यार करो
हो रात तो सुबह का इंतज़ार करो वो पल भी आएगा जिस पल का इंतज़ार है आपको
बस खुदा पे भरोसा और वक़्त पे ऐतबार करो

नहीं आसां नहीं है यहाँ सम्भल जाना
ज़िंदगी नहीं है मौसम का बदल जाना

‘सरहदों पर बहुत तनाव है क्या,
कुछ पता तो करो चुनाव है क्या,
और खौफ बिखरा है दोनों समतो में,
तीसरी समत का दबाव है क्या’.

परेशानियों से भागना आसान होता है
हर मुश्किल ज़िन्दगी में एक इम्तिहान होता है

हिम्मत हारने वाले को कुछ नहीं मिलता ज़िंदगी में
और मुश्किलों से लड़ने वाले के क़दमों में ही तो जहाँ होता है

राजनीति की मार ने नेताओं को क्या-क्या सिखा दिया,
बड़े-बड़े वीर नेता को जनता के क़दमों पर झुका दिया.

मंज़िलें नहीं रास्ते बदलते है
जगा लो जज्बा जीतने का किस्मत कि लकीरें चाहे बदले न बदले
वक़्त जरूर बदलता है

Sarpanch Shayari Chunav

ईमानदारी को ईनाम दो
छुपकर नहीं सरेआम दो
स्वच्छ छवि वालों को
पंचायत की कमान दो

ना झूठ है ना गद्दारी है ना नियत में मक्कारी है
जनसेवक हूँ जन सेवा ही असली ज़िम्मेदारी है
सब चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार बने हैं
अपनी तो दिलों को जीतने की उम्मीदवारी है

कोई नोटों के, कोई बोतलों के सहारे बैठा है
#कोई विकास के झूठे खोखलों के सहारे बैठा है
$कोई जाकर कह दो उनसे चुनाव वही जीतेगा
जो जनता के दिलों में हौसलों के सहारे बैठा है

इस बार पंचायत में यह चर्चा है
ईमानदार ने भी भर दिया पर्चा है
भ्रष्टाचारियों तुमको बताना पड़ेगा
सरकारी पैसा कहाँ-कहाँ खर्चा है

वंचित शोषित वर्गों को झमेला मत समझना
रोज़गार के साधन को इनके ठेला मत समझना
गरीबों वंचितों शोषितों की बुलंद आवाज़ हूँ
ईमानदार हूँ इसीलिए अकेला मत समझना

विकास का परचम बना दो
जनता का जनमंच बना दो
तरक्की होगी पंचायत की
जगु भैया को सरपंच बना दो

दिल जीतना आसान मत समझना
मतदाता को नादान मत समझना
जागरूक हो गई है गाँव की जनता
चुनाव जीतने का सामान मत समझना

ईमान में जिसके इमानदारी है
काम में जिसके ज़िम्मेदारी है
ऐसी साफ-सुथरी छवि वालों को
चुनाव जिताने में समझदारी है  

ईमानदार Sarpanch Shayari

ईमानदारी को एक बार आजमा कर देख लो
जो है चरणों में उसे गले से लगा कर देख लो
हर पल सेवा में तत्पर रहा हूँ आगे भी रहूँगा
बागडोर पंचायत की एक बार थमा कर देख लो

झूठ की आंधी सच्चाई का दीप बुझा नहीं सकती
कोशिश कर ले आग पानी को जला नहीं सकती
जिसके साथ खड़ी है जनता जनार्दन की ताकत
उसे दुनिया की कोई भी ताकत हरा नहीं सकती

जन जन की आवाज़ निकली बच्चा बच्चा बोला
बेईमानों की टोली निकली ईमानदारों का टोला
सोच समझकर वोट देना जांच परख कर साथ
भ्रष्टाचारी घूम रहे हैं पहन ईमानदारी का चोला

सत्य और सच्चाई का रूप दिखते हैं
घने अंधेरे में चमकती धूप दिखते हैं
हर वक्त जनसेवा का भाव रखने वाले
नेता नहीं देवता का स्वरूप दिखते हैं

एक एक वोट पंचायत का विकास लिखेगा
जो हुआ नहीं कभी वह इतिहास लिखेगा
एक बार मौका देना ईमानदार प्रतिनिधि को
वो जनता के एक एक पैसे हिसाब लिखेगा

सच्चे हो तो नज़रों से नज़रें मिला कर देख लो
ईमानदारी को बेईमानी से हरा कर देख लो
जनता ने जिसे अपने दिल में बसा रखा है
उसको जनता के दिल से उतार कर देख लो

Sarpanch Shayari

जनता की अदालत में अब इन्सान हो जाएगा
(पंचायत का नाम) पंचायत से भ्रष्टाचार साफ हो जाएगा
झूठे वादे करके पाँच साल जनता को जो ठगा
गुनाहगारों मत सोचना गुनाह माफ़ हो जाएगा

सच्चाई के आगे कभी झूठ टिक नहीं सकता
बेईमानों के आगे ईमानदार झुक नहीं सकता
जनता के दिल को जिसने जीत लिया हो
उसकी जीत का काफिला रूक नहीं सकता

उम्मीद की ज्योति को जगने दो
गांव की तरक्की को उड़ने दो
चुनाव चिह्न सूरज को वोट देकर
विकास के सूरज को उगने दो

विकास के लिए जिनकी कोई हद नहीं
सिर्फ़ वादे करना जिनका मक़्सद नहीं
साफ़ नियत स्वच्छ छवि पहचान है
इनकी इमानदारी से बड़ा कोई क़द नहीं

दौलत के नशे का हमको मद नहीं चाहिए
जो धोखाधड़ी से बढ़े वह क़द नहीं चाहिए
जनता के आदेश पर मैदान में उतरा हूँ
वर्ना जनसेवा के लिए मुझे पद नहीं चाहिए

विकास जिसका नारा है, वह प्रत्याशी हमारा है।
वोट देकर सफल बनाना, चुनाव चिन्ह तारा है।।

जनता की पूरी तैयारी है, युवा नेता की अब बारी है।
युवा सोच को लाने की, मतदाता की ज़िम्मेदारी है।।
युवा सोच की सोच होगी, विकास की नई ख़ोज होगी।
मत सोचना कभी कबार दोस्तों ये ख़ोज हर रोज होगी।।

जागरूक जनता से वोट की अपील करता हूँ
भाषणों से नहीं काम से अपनी दलील करता हूँ
मिल जाए गर वोट के रूप में आशीर्वाद आपका
फिर पंचायत के विकास को गतिशील करता हूँ

जिस ख़ून में जोश नहीं वो ख़ून किस काम का
मुर्दों में गिनती हो ज़िंदा है वो बस नाम का