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सामाजिक स्टेटस इन हिंदी | Samajik Shayari

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सामाजिक स्टेटस इन हिंदी

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1.मुश्किलें तो “साज़” हैं ज़िंदगी का,
“आने दो-आने दो”। उठूंगा,
गिरूंगा फिर उठूंगा और आखिर में
“जीतूंगा मैं ही” ये ठान के चलता हूँ!”

2.वो रिश्तों की परवाह करते है…!!
“जो लोग आपकी मदद करने के लिए आगे आते हैं,
वो इसलिए नहीं कि, आपका उन पर कोई कर्ज बाकी है;

3.“ठोकरें ख़ाता हूँ पर,
“शान” से चलता हूँ।
मैं खुले आसमान के नीचे,
सीना तान के चलता हूँ।

4.“जो दोस्त आगे बढ़कर होटल के बिल का पेमेंट करतें हैं,
वो इसलिए नहीं कि, उनके पास खूब पैसा है;

5.तेरी बातों से सदियों के बने रिश्ते बिखरते हैं,
वो गंगा और जमुना के किनारे जोड़ आया था।

6.तेरी सियासत की रोटी सिकती है दंगे भड़कने पर,
वो दंगे रोकने को रोटी-पानी छोड़ आया था।

7.ख़ुद्दारियों के ख़ून को अरज़ाँ न कर सके हम
अपने जौहरों को नुमायाँ न कर सके
होकर ख़राब-ए-मय तेरे ग़म तो भुला दिये
लेकिन ग़म-ए-हयात का दरमाँ न कर सके

8.टूटा तलिस्म-ए-अहद-ए-मोहब्बत कुछ इस तरह
फिर आरज़ू की शमा फ़ुरेज़ाँ न कर सके
हर शय क़रीब आ के कशिश अपनी खो गई
वो भी इलाज-ए-शौक़-ए-गुरेज़ाँ न कर सके

9.किस दरजा दिल-शिकन थे मोहब्बत के हादसे
हम ज़िन्दगी में फिर कोई अरमाँ न कर सके
मायूसियों ने छीन लिये दिल के वल-वले
वो भी निशात-ए-रूह का सामाँ न कर सके

10.हम रूठे तो किसके भरोसे,
कौन आएगा हमें मनाने के लिए, हो सकता है,
तरस आ भी जाए आपको.. पर दिल कहाँ से लाये..
आप से रूठ जाने के लिए

11.डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो…..
और फिर कश्ती का बोझ कहकर हमे ही उतारा गया…!

12.बेनाम सा यह दर्द ठहर क्यों नही जाता;
जो बीत गया है वो गुज़र क्यों नही जाता;
सब कुछ तो है क्या ढूँढती रहती हैं निगाहें;
क्या बात है मैं वक्त पे घर क्यूं नही जाता;