समझ_से_बाहर_शायरी

समझ से बाहर शायरी | समझ से परे शायरी

समझ से बाहर शायरी | ना समझ शायरी | समझ सको शायरी | समझ से परे शायरी | Samajh Se Bahar Shayari अभी कुछ दूरियां तो कुछ फांसले बाकी हैं, पल-पल सिमटती शाम से कुछ रौशनी बाकी है,

समझ से बाहर शायरी

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1.जज़्बात कहते हैं खामोशी से बसर हो जाए…
दर्द की ज़िद्द है कि दुनिया को खबर हो जाए…

2.प्यार व्यार कुछ नही होता है !
जो जिसके ज्यादा करीब रहता है !
वो उसका हो जाता है !!
जिस दिन बंद कर ली हमने आंखें,
कई आँखों से उस दिन आंसु बरसेंगे,
जो कहते हैं के बहुत तंग करते है हम,
वही हमारी एक शरारत को तरसेंगे.

3.जब आप का नाम जुबान पर आता है
पता नही दिल क्यों मुस्कुराता है
तसल्ली होती है मन को कोई तो है
अपना जो हँसते हुए हर वक्त याद आता है…!!

4.कभी इतना मत मुस्कुराना की नजर लग जाए जमाने की,
हर आँख मेरी तरह मोहब्बत की नही होती….!!!

5.हौसले के तरकश में, कोशिश का वो तीर ज़िंदा रखो..
हार जाओ चाहे जिन्दगी मे सब कुछ,
मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिन्दा रखो!