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प्यार में धोखा खाई हुई शायरी | Pyar Me Dhoka Khai Hui Shayari

प्यार में धोखा खाई हुई शायरी ऐ समन्दर मैं तुझसे वाकिफ हूं मगर इतना बताता हूं, वो आंखें तुझसे ज्यादा गहरी हैं जिनका मैं आशिक हूं..!! खून अभी वो ही है ना ही शोक बदले ना ही जूनून, सून लो फिर से, रियासते गयी है रूतबा नही, रौब ओर खोफ आज भी वही हें | Pyar Me Dhoka Khai Hui Shayari

प्यार में धोखा खाई हुई शायरी

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1.मैं तेरे नसीब की बारिश नहीं जो तुझ पर बरस जाऊँ ……
तुझे तकदीर बदलनी होगी मुझे पाने के लिए…..

2.सारा जहां उसीका है
जो मुस्कुराना जानता है
रोशनी भी उसी की है जो शमा जलाना जानता है
हर जगह मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे है।
लेकीन इश्वर तो उसीका है जो
“सर” झुकाना जानता है..

3.दुनिया का सबसे अच्छा तोहफा “वक्त” है। क्योंकी,
जब आप किसीको अपना वक्त देतें हैँ,
तो आप उसे अपनी “जिंदगी” का वह पल देतें हैं,
जो कभी लौटकर नहीं आता…

4.बनाते फिरते हैं
रिश्ते जमाने भर से
हम अक्सर
मगर घर मे
जरूरत हो तो
हम अपने रिश्ते
भूल जाते हैं.

5.वो नहीं आता पर निशानी भेज देता है
ख्वाबो में दास्ताँ पुरानी भेज देता है
कितने मीठे हे उसकी यादो के मंज़र
कभी कभी आँखों में पानी भेज देता है!!

6.तुझसे मिले तो तेरे तलबगार हो गए,
हम आप अपनी राह की दीवार हो गए
मैं बोल के भी तुमसे मुख़ातिब न हो सका,
तुम चुप रहे तो प्यार का इज़हार हो गए
अब हम भी चाहते हैं मसीहाई फ़ैसला,
झूठी तसल्लियों से तो बीमार हो गए

7.किस्मत और दिल की आपस में कभी नहीं बनती…
जो लोग दिल में होते हैं वो “किस्मत” में नहीं होते…।
तारे भी चमकते हैं बादल भी बरसते हैं..
तुम दिल में हो फिर भी हम मिलने को तरसते हैं.

8.दिल में है जो दर्द वो दर्द किसे बताएं!
हंसते हुए ये ज़ख्म किसे दिखाएँ!
कहती है ये दुनिया हमे खुश नसीब!
मगर इस नसीब की दास्ताँ किसे बताएं!

प्यार में धोखा खाई हुई शायरी

9.बगैर जाने-पहचाने इक़रार ना कीजिये;
मुस्कुरा कर यूँ दिलों को बेक़रार ना कीजिये;
फूल भी दे जाते हैं ज़ख़्म गहरे कभी-कभी;
हर फूल पर यूँ ऐतबार ना कीजिये।

10.कभी दोस्ती कहेंगे कभी बेरुख़ी कहेंगे;
जो मिलेगा कोई तुझसा उसे ज़िन्दगी कहेंगे;
तेरा देखना है जादू तेरी गुफ़्तगू है खुशबू;
जो तेरी तरह चमके उसे रोशनी कहेंगे।

11.हर बार दिल से ये पैगाम आए;
ज़ुबाँ खोलूं तो तेरा ही नाम आए;
तुम ही क्यूँ भाए दिल को क्या मालूम;
जब नज़रों के सामने हसीन तमाम आए|

12.क्यों तू अच्छा लगता है, वक़्त मिला तो सोचेंगे;
तुझ में क्या क्या देखा है, वक़्त मिला तो सोचेंगे;
सारा शहर शहंशाही का दावेदार तो है लेकिन;
क्यों तू हमारा अपना है, वक़्त मिला तो सोचेंगे।

13.दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई;
दोनों को इक अदा में रजामंद कर गई;
शक हो गया है सीना, ख़ुशी लज्जते-फ़िराक;
तकलीफे-पर्दादारी-ए-ज़ख्म-जिगर गई!

14.ये दिल भुलाता नहीं है मोहब्बतें उसकी;
पड़ी हुई थी मुझे कितनी आदतें उसकी;
ये मेरा सारा सफर उसकी खुशबू में कटा;
मुझे तो राह दिखाती थी चाहतें उसकी।

15.दुख मे खुशी की वजह बनती है मोहब्बत;
दर्द मे यादों की वजह बनती है मोहब्बत;
जब कुछ भी अच्छा नहीं लगता दुनिया में;
तब जीने की वजह बनती है मोहब्बत।

16.कुछ सोचूं तो तेरा ख्याल आ जाता है;
कुछ बोलूं तो तेरा नाम आ जाता है;
कब तलक बयाँ करूँ दिल की बात;
हर सांस में अब तेरा एहसास आ जाता है।

17.दिल की हसरत मेरी ज़ुबान पे आने लगी;
तुमने देखा और ये ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी;
ये इश्क़ के इन्तहा थी या दीवानगी मेरी;
हर सूरत में मुझे सूरत तेरी नज़र आने लगी।