Poetries-on-Love-In-Hindi

Best Poetries on Love In Hindi | Romantic Poetries 2021

Romantic poetries on love in hindi 2021

तुम्हारा आना

जीवन में नया सवेरा लाना

सुबह की पहली चाय और

घर मेरा आबाद करना

दिल ने फिर याद किया

एक ही साईकल पर हम दोनों का

यूहीं कभी टहलने निकल जाना

बारिश में एक ही छतरी के नीचे

हम दोनों का आधा आधा भीगना

दिल ने फिर याद किया

समंदर किनारे रेत पर बैठकर

पिघलते आसमान को निहारना

अपनी आइसक्रीम पहले खाकर

मेरी वाली को देखकर तुम्हारा ललचाना

दिल ने फिर याद किया

तुम्हारे बालों को लेफ्ट फ्लिप करना

और लटों को कान के पीछे लगाना

तुम्हारी खुशबू से दिन भर

मेरी सांसों का महकना

दिल ने फिर याद किया

तुम्हारे होने से मेरा होना

तुम्हारे होने से हमारा होना

अब जबकि मैं जानता हूँ तुम

नहीं हो कहीं भी मगर फिर भी

दिल ने आज फिर याद किया…

जाने क्यूँ??

गुम है हँसी और चहरे पर है सिर्फ ख़ामोशी ….

क्या कभी ढूंढ पाऊँगी मैं ? मेरी वही बच्चों सी हँसी…

बोलती बहूत हूँ मैं, फिर भी कुछ बोल नही पाती हूँ मैं…

जाने क्यूँ अपनों से ही, अपना हर गम छिपाती हूँ मैं?….

समझ जाती हूँ , सबकी बातों को मैं……

पर खुद दूसरों को अपनी बात समझा नही पाती हूँ मैं…

जाने क्यूँ हर रोज, खुद में ही घुट -घुट के रह जाती हूँ मैं?

खुद रोकर हर बार सबको हँसाती हूँ मैं..

सबके ग़मो को खुद में समेटकर..

उन्हें हर पल में जीना सिखाती हूँ मैं..

फिर भी, जाने क्यूँ युही अकेली तन्हा सी रह जाती हूँ मैं?. ..

कभी-कभी थोड़ा जीभर के अकेले में ही खिलखिलाती हूँ मैं…

अपनी इतनी सी ख़ुशी के लिये भी…

दुसरों पर, जाने क्यूँ बोझ बन जाती हूँ मैं?…

फिर भी गमों का आँचल थाम कर, युही मुस्कुराती हूँ मैं..

“सोचता हूँ, के कमी रह गई शायद कुछ या
जितना था वो काफी ना था,
नहीं समझ पाया तो समझा दिया होता
या जितना समझ पाया वो काफी ना था,
शिकायत थी तुम्हारी के तुम जताते नहीं
प्यार है तो कभी जमाने को बताते क्यों नहीं,
अरे मुह्हबत की क्या मैं नुमाईश करता
मेरे आँखों में जितना तुम्हें नजर आया,
क्या वो काफी नहीं था I
सोचता हूँ के क्या कमी रह गई,
क्या जितना था वो काफी नहीं था I”

“खुद पर गुरुर था तुम्हें की तुम मुहब्बत के बारे में सब जानते हो,
अच्छा चलो बताओ उसकी आंखों को ठीक से पहचानते हो I
क्या गलतफमी लिए जी रहे थे अब तक की तुम्हें मुहब्बत के हर रास्ते मालूम है,
अच्छा चलो बताओ उसके दिल तक पहुंचने का रास्ता जानते हो I
इश्क़ की सीढ़ी लगा कर जिस्म तक पहुंचने का तरीका सबको मालूम है यहाँ,
अच्छा चलो बताओ उसके रूह से गुफ्तगू करने का तरीका जानते हो II”

“खुद पर गुरुर था तुम्हें की तुम मुहब्बत के बारे में सब जानते हो,
अच्छा चलो बताओ उसकी आंखों को ठीक से पहचानते हो I
क्या गलतफमी लिए जी रहे थे अब तक की तुम्हें मुहब्बत के हर रास्ते मालूम है,
अच्छा चलो बताओ उसके दिल तक पहुंचने का रास्ता जानते हो I
इश्क़ की सीढ़ी लगा कर जिस्म तक पहुंचने का तरीका सबको मालूम है यहाँ,
अच्छा चलो बताओ उसके रूह से गुफ्तगू करने का तरीका जानते हो II”