nayi-zindagi-ki-suruat-shayari

Best नई जिंदगी की शुरुआत शायरी Status Quotes

Best नई जिंदगी की शुरुआत शायरी Status Quotes सिर्फ सांसे चलते रहने को ही ज़िन्दगी नही कहते आँखों में कुछ ख़वाब और दिल में उम्मीदे होना जरूरी है ज़िन्दगी कभी आसन नही होती इसे आसान करना पड़ता है कुछ नजर अंदाज करके कुछ को बर्दास्त करके पहचानूं कैसे तुझ को मेरी ज़िंदगी बता, गुजरी है तू करीब से लेकिन नकाब में।

नई जिंदगी की शुरुआत शायरी

nayi-zindgi-ki-suruat-shayari-1

आया ही था खयाल कि आँखें छलक पड़ीं आँसू किसी की याद के कितने करीब हैं

सिर्फ सांसे चलते रहने को ही ज़िन्दगी नही कहते आँखों में कुछ ख़वाब और दिल में उम्मीदे होना जरूरी है

मुझे ज़िन्दगी का इतना तजुर्बा तो नही पर सुना है सादगी में लोग जीने नही देते

ज़िन्दगी में ऐसे लोग भी होते है जिन्हें हम प् नही सकते सिर्फ चाह सकते है

ज़िन्दगी कभी आसन नही होती इसे आसान करना पड़ता है कुछ नजर अंदाज करके कुछ को बर्दास्त करके

मत सोच इतना ज़िन्दगी के बारे में जिसने ज़िन्दगी दी है उसने भी कुछ तो सोचा होगा

समंदर न सही पर एक नदी तो होनी चाहिए, तेरे शहर में ज़िंदगी कहीं तो होनी चाहिए।

इक टूटी-सी ज़िंदगी को समेटने की चाहत थी, न खबर थी उन टुकड़ों को ही बिखेर बैठेंगे हम।

फिक्र है सबको खुद को सही साबित करने की, जैसे ये ज़िंदगी, ज़िंदगी नहीं, कोई इल्जाम है।

ले दे के अपने पास एक नजर तो है,क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नजर से हम।

नफरत सी होने लगी है इस सफ़र से अब, ज़िंदगी कहीं तो पहुँचा दे खत्म होने से पहले।

कुछ इस तरह फ़कीर ने ज़िंदगी की मिसाल दी, मुट्ठी में धूल ली और हवा में उछाल दी।

ज़िंदगी जिसका बड़ा नाम सुना है हमने, एक कमजोर सी हिचकी के सिवा कुछ भी नहीं।

एक उम्र गुस्ताखियों के लिये भी नसीब हो, ये ज़िंदगी तो बस अदब में ही गुजर गई।

जो तेरी चाह में गुजरी वही ज़िंदगी थी बस, उसके बाद तो बस ज़िंदगी ने गुजारा है मुझे।

अकेले ही गुजर जाती है तन्हा ज़िंदगी, लोग तसल्लियाँ तो देते हैं साथ नहीं देते।

पहचानूं कैसे तुझ को मेरी ज़िंदगी बता, गुजरी है तू करीब से लेकिन नकाब में।

हर बात मानी है तेरी सिर झुका कर ऐ ज़िंदगी, हिसाब बराबर कर तू भी तो कुछ शर्तें मान मेरी।

इतनी बदसलूकी ना कर, ऐ जिंदगी हम कौन सा यहाँ बार बार आने वाले हैं।

जिंदगी भी तवायफ की तरह होती है, कभी मज़बूरी में नाचती है कभी मशहूरी में ।

नई जिंदगी की शुरुआत शायरी 2022

nayi-zindgi-ki-suruat-shayari-2

यूँ ही खत्म हो जायेगा जा़म की तरह जिन्दगी का सफ़र, कड़वा ही सही एक बार तो नशे में होकर इसे पिया जाये।

खुशी में भी आँखें आँसू बहाती रही, ज़रा सी बात देर तक रूलाती रही, कोई खो के मिल गया तो कोई मिल के खो गया, ज़िंदगी हम को बस ऐसे ही आज़माती रही।

आराम से तनहा कट रही थी तो अच्छी थी, जिंदगी तू कहाँ दिल की बातों में आ गयी ।

रफ़्तार कुछ इस कदर तेज़ हुई है जिन्दगी की, कि सुबह का दर्द शाम को पुराना हो जाता है।

बस एक नजर है… ले दे के अपने पास, क्यूँ देखें ज़िन्दगी को किसी की नज़र से।

परेसान हो चुके हैं ज़िन्दगी की कशमकश से हम ठुकरा न दें ज़माने को कहीं बेदिली से हम

तू कोई दरिया है कि सागर है कोई ऐ ज़िन्दगी, मुझको मालूम तो हो कौन से पानी में हूँ मैं।

कभी मेरे साथ चल के, कभी मुझ को साथ लेकर, वो बदल गए अचानक, मेरी ज़िन्दगी बदल के।

अब समझ लेता हूँ मीठे लफ़्ज़ों की कड़वाहट, हो गया है ज़िंदगी का तजुर्बा थोड़ा थोड़ा।

कितना और बदलूं खुद को ज़िंदगी जीने के लिए, ऐ ज़िंदगी, मुझको थोड़ा सा मुझमें बाकी रहने दे।

हासिल-ए-ज़िंदगी हसरतों के सिवा और कुछ भी नहीं, ये किया नहीं, वो हुआ नहीं, ये मिला नहीं, वो रहा नहीं।

बड़े ही अजीब हैं ये ज़िन्दगी के रास्ते, अनजाने मोड़ पर कुछ लोग अपने बन जाते हैं, मिलने की खुशी दें या न दें, मगर बिछड़ने का गम ज़रूर दे जाते हैं।

प्यार में किसी को खोना भी ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी में ग़मों का होना भी ज़िन्दगी है, यूं तो रहती है होठों पर मुस्कराहट, पर किसी के लिए रोना भी ज़िन्दगी है।

क्यों वक़्त के साथ रंगत खो जाती है, हँसती खेलती ज़िन्दगी भी आम हो जाती है, एक सवेरा था जब हँसकर उठा करते थे हम, आज बिना मुस्कुराये ही शाम हो जाती है।

अपनी तो ज़िन्दगी की अजीब कहानी है, जिस चीज़ को चाहा वो ही बेगानी है, हँसते हैं दुनिया को हँसाने के लिए वरना, दुनिया डूब जाये इन आँखों में इतना पानी है।

अजीब तरह से गुजर गयी मेरी भी ज़िन्दगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।

जीने का हौसला कभी मरने की आरज़ू, दिन यूँ ही धूप-छाँव में अपने भी कट गए।

किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंजिल, कोई हमारी तरह उम्र भर सफर में रहा।

  शाम तक सुबह की नजरों से उतर जाते हैं, इतने समझौतों पे जीते हैं कि मर जाते हैं।

ज़िन्दगी सिर्फ मोहब्बत नहीं कुछ और भी है, ज़ुल्फ़-ओ-रुखसार की जन्नत नहीं कुछ और भी है, भूख और प्यास की मारी हुई इस दुनिया में, इश्क ही इक हकीकत नहीं कुछ और भी है।

ज़िन्दगी उस अजनबी मोड़ पर ले आई है, तुम चुप हो मुझसे और मैं चुप हूँ सबसे।

कितना मुश्किल है ज़िन्दगी का ये सफ़र, खुदा ने मरना हराम किया लोगों ने जीना।

मंज़िलें तेरे अलावा भी कई है लेकिन, ज़िन्दगी किसी और राह पे चलती ही नहीं।

रूकती नहीं है किसी के लिये मौजे-जिन्दगी, धारे से जो हटे वो किनारे पर आ गये।

सरे-आम मुझे ये शिकायत है ज़िन्दगी से, क्यूँ मिलता नहीं मिजाज़ मेरा किसी से।

  आराम से तन्हा कट रही थी तो अच्छी थी, ज़िन्दगी तू कहाँ दिल की बातों में आ गयी।

ज्यादा ख़्वाहिशें नहीं ऐ ज़िन्दगी तुझसे, बस अगला कदम पिछले से बेहतरीन हो।

ऐ ज़िन्दगी जा ढूढ़ कोई गुम गया है मुझ से, अगर वो ना मिला तो तेरी भी जरुरत नही

मैंने जिन्दगी से पूछा.. सबको इतना दर्द क्यों देती हो? जिन्दगी ने हंसकर जवाब दिया, मैं तो सबको ख़ुशी ही देती हूँ, पर एक की ख़ुशी दुसरे का दर्द बन जाती है।

रास्ते ज़िन्दगी के बहुत ही हसीन हैं, सभी को किसी न किसी की तालाश है, किसी के पास मंज़िल है तो राह नहीं, और किसी के पास राह है तो मंज़िल नहीं।

जब दिल किसी बोझ से थक जाता है, एहसास की लौ और भी बढ़ जाती है, मैं बढ़ता हूँ ज़िन्दगी की तरफ लेकिन, ज़ंजीर सी पाँव में खनक जाती है।

ज़िंदगी की दौड़ मे कच्चा रह गया, नही सीखा फ़रेब बच्चा रह गया।

ज़रूरी तो नहीं के शायरी वो ही करे जो इश्क में हो, ज़िन्दगी भी कुछ ज़ख्म बेमिसाल दिया करती है।

जिन्दगी तेरी भी, अजब परिभाषा है, सँवर गई तो जन्नत, नहीं तो सिर्फ तमाशा है।

ज़िन्दगी आज फिर खफा है हमसे, जाने दो न दोस्तो, कहाँ पहेली दफा है।

कुछ दोस्त कमाओ थोड़ा प्यार खर्च करो, ज़िन्दगी में हिसाब कुछ इस तरह से करो।

ए-ज़िन्दगी, इतनी ठोकरे देने के लिए शुक्रिया, चलने का न सही सम्भलने का हुनर तो आया।