mokaparsti-par-shayari

मौकापरस्ती पर शायरी | Mokaparsti Par Shayari

मौकापरस्ती पर शायरी | Mokaparsti Par Shayari In Hindi Sad Love Emotional Quotes Status Shayari On Mokaparsti share Whatsapp For Image Shayari In Hindi

मौकापरस्ती पर शायरी

mokaparsti-par-shayari-hindi

Free Download
1

1.जाती है धुप उजले परो को समेट के ,
जख्म को अब गिनूगा मे बिस्तर पे लेट के !!
लोग समझते है हम बस तुम्हारे हुस्न पर मरते है।
अगर तुम भी यही समझते हो तो सुनो जब हुस्न ढल जाये तो लौट आना।।

2

2.तमन्ना हो मिलने की तो,
बंद आँखों मे भी नज़र आएँगे,
महसूस करने की कोशिश तो कीजिए,
दूर होते हुए भी पास नज़र आएँगे !!

3

3.आये हो तो कुछ देर तो ठहर जाओ इन आँखों में,
तुम्हे क्या पता एक उम्र लग जाती है एक ख्वाब सजाने में।।

4

4.ज़रा सी बात होती है तो.
तन्हा छोड़ जाते है,
“मोहब्बत कर के लोगो से.
संभाली क्यों नही जाती …??

5

5.यूँ मेरा बेवजह मुस्कुराना भी तेरे इश्क़ की ही बदौलत है
लोग यूँ ही कहते हैं कि मेरी हँसी खुदा की दी दौलत है।

6

6.बेखुदी को उभार देती है
गम की दुनिया सवार देती है
जाने क्या चीज है मोहब्बत भी
जिंदगी को निखार देती है.

मौकापरस्ती शायरी

7

7.वफा के बदले बेवफाई ना दिया करो..
मेरी उमीद ठुकरा कर इन्कार ना किया करो..
तेरी महोब्त में हम सब कुछ खो बैठे..
जान चली जायेगी इम्तिहान ना लिया करो

8

8.कहाँ पर बोलना है और कहाँ पर बोल जाते हैं।
जहाँ खामोश रहना है वहाँ मुँह खोल जाते हैं।।

9

9.कटा जब शीश सैनिक का तो हम खामोश रहते हैं।
कटा एक सीन पिक्चर का तो सारे बोल जाते हैं।।

10

10.नयी नस्लों के ये बच्चे जमाने भर की सुनते हैं।
मगर माँ बाप कुछ बोले तो बच्चे बोल जाते हैं।।

11

11.बहुत ऊँची दुकानों में कटाते जेब सब अपनी।
मगर मज़दूर माँगेगा तो सिक्के बोल जाते हैं।।

12

12.अगर मखमल करे गलती तो कोई कुछ नहीँ कहता।
फटी चादर की गलती हो तो सारे बोल जाते हैं।।

13

13.हवाओं की तबाही को सभी चुपचाप सहते हैं।
च़रागों से हुई गलती तो सारे बोल जाते हैं।।

14

14.बनाते फिरते हैं रिश्ते जमाने भर से अक्सर।
मगर जब घर में हो जरूरत तो रिश्ते भूल जाते हैं।।

15

15.वो मेरे पास से गुजरे और मेरा हाल तक न पूछा,
हम कैसे यकीन करें, वो दूर जाकर रोये होंगे…!

16

16.गिर के संभलने के हुनर से हम भी वाकिफ थे,गिरे फ़क़त इस वास्ते कि..
ठोकर तो उस पत्थर ने मारा जिसे हमने खुदा माना ।।

17

17.वो करीब बहुत है…मगर कुछ दूरियों के साथ…,
हम दोनों जी तो रहे है…पर बहुत सी मजबूरीयों के साथ…।

18

18.कोई कह दे गमो से , बाँध ले समान अब अपना…
बहुत दिन का तो रूका मेहमान भी अच्छा नही लगता…