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खूबसूरत मोहब्बत शायरी | इश्क मोहब्बत की शायरी Mohabbat Shayari

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इश्क मोहब्बत की शायरी

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“ना दिल की चली ना आँखों की, हम तो दीवाने बस तेरी मुस्कान के हो गए !!”

“मालूम था मालूम है की कुछ भी नहीं हासिल होगा,
लेकिन वो इश्क ही क्या जिसमें ख़ुद को तड़पाया ना जाये !!”

तुम्हारी “याद” का “दरिया” और “तन्हा” दिल की “कश्ती”…!!
दूर “फ़लक़” तक “यादें”, न कोई “ज़मीन” न कोई “बस्ती”…!!

नया दर्द एक और दिल में जगा कर चला गया​;​ ​​
कल फिर वो मेरे शहर में आकर चला गया​;​ ​​
जिसे ढूंढ़ता रहा मैं लोगों ​की भीड़ में;​ ​​
मुझसे वो अप​ने आप ​को छुपा कर चला गया।

आज आपके प्यार में कमी देखी;
चाँद की चांदनी में कुछ नमी देखी;
उदास होकर लौट आए हम;
जब महफ़िल आपकी गैरों से सजी देखी।

कोई समझता नहीं उसे इसका गम नहीं करता;
पर तेरे नजरंदाज करने पर हल्का सा मुस्कुरा देता है;
उसकी हंसी में छुपे दर्द को महसूस तो कर;
वो तो हंस के यूँ ही खुद को सजा देता है।

इक बार ही जीने कि सजा क्युँ नही देते,
गर हर पे खता हो तो मिटा क्युँ नही देते।।
अब शिद्दते गम से मेरा दम घुटने लगा है,
तुम रेशमी जुल्फो कि हवा क्युँ नही देते।।
तुम इतने गरमोँ निशाँ गम खार हो मेरे तो,
यारो मुझे मरने कि दुआ क्युँ नही देते।।
साया हुँ तो फिर साथ रखने का सबब क्या,
पत्थर हुँ तो रस्ते से हटा क्युँ नही देते।।
रहजन हो तो फिर शौक से लुटो वफाएँ दिल,
रहबर हो तो मँजिल का पता क्युँ नही देते।।

एक बार ही जी भर के सज़ा क्यूँ नहीं देते ?
मैं हर्फ़-ए-ग़लत हूँ तो मिटा क्यूँ नहीं देते ?
मोती हूँ तो दामन में पिरो लो मुझे अपने,
आँसू हूँ तो पलकों से गिरा क्यूँ नहीं देते ?
साया हूँ तो साथ ना रखने कि वज़ह क्या ‘फ़राज़’,
पत्थर हूँ तो रास्ते से हटा क्यूँ नहीं देते ?

किसी को ये सोचकर साथ मत छोड़ना
की उसके पास कुछ नहीं तुम्हे देने के लिए;
बस ये सोचकर साथ निभाने की
उसके पास कुछ नहीं है तुम्हारे सिवा खोने के लिए!

जो दूसरों को इज़्ज़त देता है
असल में वो खुद इज़्ज़तदार होता है…
क्योकि इंसान दूसरो को वही दे पाता है
जो उसके पास होता है..!

Mohabbat Shayari In Hindi

दिल की धड़कन रुक सी गई
सांसें मेरी थम सी गई
पूछा हमने दिल के डॉक्टर से तो पता चला
कि सर्दी के कारण आपकी यादें दिल में जम सी गई।

हमारे दर्द में, ग़म में फटकने भी नहीं आये,
वो मितरों कह के हाथों को झटकने भी नहीं आये !
कहॉं तो कह रहे थे मुझको फॉंसी पर चढा देना,
मगर जब वक्त आया तो लटकने भी नहीं आये !

ये किसने कह दिया तुमसे की इनका बम से रिश्ता है,
बहुत है जख्म सीने मे फक़त मरहम से रिश्ता है,,
वो तुम हो जो तिजारत करते हो बारूद की साहब,,,
ये है इमान वाले इनका जमजम से रिश्ता है…

उसे अबकी वफाओं से गुजर जाने की जल्दी थी
मगर इस बार मुझको अपने घर जाने की जल्दी थी
इरादा था कि मैं कुछ देर तूफां का मजा लेता
मगर बेचारे दरिया को उतर जाने की जल्दी थी

लब्जों से नहीं,हम आँखों से,बात करते हैं ,
दिल से नहीं,हम दिल में उतर के, प्यार करते हैं..!

कागज़ पे हमने भी ज़िन्दगी लिख दी,
अश्क से सींच कर उनकी खुशी लिख दी,
दर्द जब हमने उबारा लफ्जों पे,
लोगों ने कहा वाह क्या गजल लिख दी..

अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो,
मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो,
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना,
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले मेरा नाम तो होने दो..

रोज़ याद न कर पाऊँ तो खुदग़रज़ ना समझ लेना,
दरअसल छोटी सी जिन्दगी है। और परेशानियां बहुत हैं..!!

मैं भूला नहीं हूँ किसी को…
मेरे बहुत अच्छे दोस्त है ज़माने में ..
बस जिंदगी उलझी पड़ी है ..
दो वक़्त की रोटी कमाने में।. .

मोहब्बत भरी शायरी‎ Mohabbat Shayari

कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी,
कभी याद आ कर उनकी जुदाई मार गयी,
बहुत टूट कर चाहा जिसको हमने,
आखिर में उनकी ही बेवफाई मार गयी…

…अच्छी है याद तेरी अच्छा है
नाम तेरा …. . ओ दुर के रहने वाले कैसा है
हाल तेरा … …दिल में तेरी याद होठों पे सिर्फ नाम तेरा
.. ..मेरे दिल मै बसने वाले तुझको है सलाम मेरा …

हर एक की सुनो ओर हर एक से सीखो क्योंकि हर कोई,
सब कुछ नही जानता लेकिन हर एक कुछ ना कुछ ज़रुर जानता हैं!

स्वभाव रखना है तो उस दीपक की तरह रखिये,
जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता है,
जितनी की किसी गरीब की झोपड़ी में….

“जहाँ प्रयत्नों की उंचाई”
“अधिक होती हैं” “वहाँ नसीबो को भी”
“झुकना पड़ता हैं” “मेरे दोस्त”
परिवर्तन से डरना और संघर्ष से कतराना,
मनुष्य की सबसे बड़ी कायरता है !
जीवन का सबसे बड़ा गुरु वक्त होता है,
क्योंकि जो वक्त सिखाता है
वो कोई नहीं सिखा सकता

मेरी आँखों में पढ़ लेते हैं
लोग तेरे इश्क़ की आयतें…
किसी में इतना बस जाना भी अच्छा नहीं होता ♥…!!
कभी तो खर्च कर दिया करो.. खुद को मुझ पर…
तसल्ली रहें.. मामूली नही है हम….

लडकियाँ हमेशा उसे प्यार करती है
जो उन्हे छोड देते है,
और उन्हे छोड देती है
जो सिर्फ उनसे प्यार करते है।

मोहब्बत का कोई कुसूर नहीं ….
उसे तो मुझसे रूठना ही था……​ ​
दिल मेरा शीशे सा साफ़….
और शीशे का अंजाम तो टूटना ही था….

सफर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो,
नजर वही तक है जहाँ तक तुम हो,
हजारों फूल देखे हैं इस गुलशन में मगर,
खुशबू वहीं तक है जहाँ तक तुम हो।

तेरे शहर के कारीगर बङे अजीब हैं ए दिल,,
काँच की मरम्मत करते हैं पत्थर के औजारों से …..

चुपके से आकर मेरे कान मे,
एक तितली कह गई अपनी ज़ुबान मे…
उड़ना पड़ेगा तुमको भी,
मेरी तरह इस तूफान मे…