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Best Mir Taqi Mir Shayari Poetry Quotes 2 Lines

Best Mir Taqi Mir Shayari Poetry Quotes 2 Lines With Images मीर तकी मीर शायरी Show Poetry Shayari Mir Taqi Mir Share On Whatsapp & Facebook Freinds 2021 New Latest Shayari

Mir Taqi Mir Shayari In Hindi Poetry Quotes

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1.सुला चुकी थी ये दुनिया थपक थपक के मुझे
जगा दिया तेरी पाज़ेब ने खनक के मुझे

कोई बताये के मैं इसका क्या इलाज करूँ
परेशां करता है ये दिल धड़क धड़क के मुझे

ताल्लुकात में कैसे दरार पड़ती है
दिखा दिया किसी कमज़र्फ ने छलक के मुझे

हमें खुद अपने सितारे तलाशने होंगे
ये एक जुगनू ने समझा दिया चमक के मुझे

बहुत सी नज़रें हमारी तरफ हैं महफ़िल में
इशारा कर दिया उसने ज़रा सरक के मुझे

मैं देर रात गए जब भी घर पहुँचता हूँ
वो देखती है बहुत छान के फटक के मुझे

2.उँगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो
खर्च करने से पहले कमाया करो

ज़िन्दगी क्या है खुद ही समझ जाओगे
बारिशों में पतंगें उड़ाया करो

दोस्तों से मुलाक़ात के नाम पर
नीम की पत्तियों को चबाया करो

शाम के बाद जब तुम सहर देख लो
कुछ फ़क़ीरों को खाना खिलाया करो

अपने सीने में दो गज़ ज़मीं बाँधकर
आसमानों का ज़र्फ़ आज़माया करो

चाँद सूरज कहाँ, अपनी मंज़िल कहाँ
ऐसे वैसों को मुँह मत लगाया करो

 

3.जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है
वो शख्स, सिर्फ भला ही नहीं, बुरा भी है

मैं पूजता हूँ जिसे, उससे बेनियाज़ भी हूँ
मेरी नज़र में वो पत्थर भी है खुदा भी है

सवाल नींद का होता तो कोई बात ना थी
हमारे सामने ख्वाबों का मसला भी है

जवाब दे ना सका, और बन गया दुश्मन
सवाल था, के तेरे घर में आईना भी है

ज़रूर वो मेरे बारे में राय दे लेकिन
ये पूछ लेना कभी मुझसे वो मिला भी है

 

4.मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ
सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूँ

कभी चुपके से चला आऊँ तेरी खिलवत में
और तुझे तेरी निगाहों से बचा कर देखूँ

मैने देखा है ज़माने को शराबें पी कर
दम निकल जाये अगर होश में आकर देखूँ

दिल का मंदिर बड़ा वीरान नज़र आता है
सोचता हूँ तेरी तस्वीर लगा कर देखूँ

तेरे बारे में सुना ये है के तू सूरज है
मैं ज़रा देर तेरे साये में आ कर देखूँ

याद आता है के पहले भी कई बार यूं ही
मैने सोचा था के मैं तुझको भुला कर देखूँ

 

5.वफ़ा को आज़माना चाहिए था,
हमारा दिल दुखाना चाहिए था
आना न आना मेरी मर्ज़ी है,
तुमको तो बुलाना चाहिए था

हमारी ख्वाहिश एक घर की थी,
उसे सारा ज़माना चाहिए था
मेरी आँखें कहाँ नम हुई थीं,
समुन्दर को बहाना चाहिए था

जहाँ पर पंहुचना मैं चाहता हूँ,
वहां पे पंहुच जाना चाहिए था
हमारा ज़ख्म पुराना बहुत है,
चरागर भी पुराना चाहिए था

मुझसे पहले वो किसी और की थी,
मगर कुछ शायराना चाहिए था
चलो माना ये छोटी बात है,
पर तुम्हें सब कुछ बताना चाहिए था

तेरा भी शहर में कोई नहीं था,
मुझे भी एक ठिकाना चाहिए था
कि किस को किस तरह से भूलते हैं,
तुम्हें मुझको सिखाना चाहिए था

ऐसा लगता है लहू में हमको,
कलम को भी डुबाना चाहिए था
अब मेरे साथ रह के तंज़ ना कर,
तुझे जाना था जाना चाहिए था

क्या बस मैंने ही की है बेवफाई,
जो भी सच है बताना चाहिए था
मेरी बर्बादी पे वो चाहता है,
मुझे भी मुस्कुराना चाहिए था

बस एक तू ही मेरे साथ में है,
तुझे भी रूठ जाना चाहिए था
हमारे पास जो ये फन है मियां,
हमें इस से कमाना चाहिए था

अब ये ताज किस काम का है,
हमें सर को बचाना चाहिए था
उसी को याद रखा उम्र भर कि,
जिसको भूल जाना चाहिए था

मुझसे बात भी करनी थी,
उसको गले से भी लगाना चाहिए था
उसने प्यार से बुलाया था,
हमें मर के भी आना चाहिए था

तुम्हे ‘सतलज ‘ उसे पाने की खातिर,
कभी खुद को गवाना चाहिए था !

Mir Taqi Mir Shayari 2 Line

6.सर पर बोझ अँधियारों का है मौला खैर
और सफ़र कोहसारों का है मौला खैर

दुशमन से तो टक्कर ली है सौ-सौ बार
सामना अबके यारों का है मौला खैर

इस दुनिया में तेरे बाद मेरे सर पर
साया रिश्तेदारों का है मौला खैर

दुनिया से बाहर भी निकलकर देख चुके
सब कुछ दुनियादारों का है मौला खैर

और क़यामत मेरे चराग़ों पर टूटी
झगड़ा चाँद-सितारों का है मौला खैर

 

7.हवा खुद अब के हवा के खिलाफ है, जानी
दिए जलाओ के मैदान साफ़ है, जानी

हमे चमकती हुई सर्दियों का खौफ नहीं
हमारे पास पुराना लिहाफ है, जानी

वफ़ा का नाम यहाँ हो चूका बहुत बदनाम
मैं बेवफा हूँ मुझे ऐतराफ है, जानी

है अपने रिश्तों की बुनियाद जिन शरायत पर
वही से तेरा मेरा इख्तिलाफ है, जानी

वो मेरी पीठ में खंज़र उतार सकता है
के जंग में तो सभी कुछ मुआफ है, जानी

मैं जाहिलों में भी लहजा बदल नहीं सकता
मेरी असास यही शीन-काफ है, जानी

 

8.जो मंसबो के पुजारी पहन के आते हैं।
कुलाह तौक से भारी पहन के आते है।

अमीर शहर तेरे जैसी क़ीमती पोशाक
मेरी गली में भिखारी पहन के आते हैं।

यही अकीक़ थे शाहों के ताज की जीनत
जो उँगलियों में मदारी पहन के आते हैं।

इबादतों की हिफाज़त भी उनके जिम्मे हैं।
जो मस्जिदों में सफारी पहन के आते हैं।

 

9.धूप बहुत है मौसम जल-थल भेजो न
बाबा मेरे नाम का बादल भेजो न

मोल्सरी की शाख़ों पर भी दिये जलें
शाख़ों का केसरिया आँचल भेजो न

नन्ही मुन्नी सब चेहकारें कहाँ गईं
मोरों के पैरों की पायल भेजो न

बस्ती बस्ती दहशत किसने बो दी है
गलियों बाज़ारों की हलचल भेजो न

सारे मौसम एक उमस के आदी हैं
छाँव की ख़ुश्बू, धूप का संदल भेजो न

मैं बस्ती में आख़िर किस से बात करूँ
मेरे जैसा कोई पागल भेजो न