Manmohak-Shayari

मनमोहक शायरी | Manmohak Shayari

मनमोहक शायरी Manmohak Shayari नज़र नवाज़ नज़रों में ज़ी नहीं लगता फ़िज़ा गई तो बहारों में ज़ी नहीं लगता ना पूछ मुझसे तेरे ग़म में क्या गुजरती है यही कहूंगा हज़ारों में ज़ी नहीं लगता !!

मनमोहक शायरी

manmohak-shayari-hindi

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1.नज़र फ़रेब-ए-कज़ा खा गई तो क्या होगा;
हयात मौत से टकरा गई तो क्या होगा;
नई सहर के बहुत लोग मुंतज़िर हैं मगर;
नई सहर भी कजला गई तो क्या होगा;
न रहनुमाओं की मजलिस में ले चलो मुझको;
मैं बे-अदब हूँ हँसी आ गई तो क्या होगा;
ग़म-ए-हयात से बेशक़ है ख़ुदकुशी आसाँ;
मगर जो मौत भी शर्मा गई तो क्या होगा;
शबाब-ए-लाला-ओ-गुल को पुकारनेवालों;
ख़िज़ाँ-सिरिश्त बहार आ गई तो क्या होगा;
ख़ुशी छीनी है तो ग़म का भी ऐतमाद न कर;
जो रूह ग़म से भी उकता गई तो क्या होगा।
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2.दोस्ती हर चहरे की मीठी मुस्कान होती है,
दोस्ती ही सुख दुख की पहचान होती है,
रूठ भी गऐ हम तो दिल पर मत लेना,
क्योकि दोस्ती जरा सी नादान होती है…!!!
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3.शायर तो हम है शायरी बना देंगे
आपको शायरी मे क़ैद कर लेंगे
कभी सूनाओ हमे अपनी आवाज़
आपकी आवाज़ को हम ग़ज़ल बना देंगे
तेरे चेहरे को कभी भुला नहीं सकता,
तेरी यादों को भी दबा नहीं सकता,
आखिर में मेरी जान चली जायेगी,
मगर दिल में किसी और को बसा नहीं सकता.
नज़र नवाज़ नज़रों में ज़ी नहीं लगता
फ़िज़ा गई तो बहारों में ज़ी नहीं लगता
ना पूछ मुझसे तेरे ग़म में क्या गुजरती है
यही कहूंगा हज़ारों में ज़ी नहीं लगता !!