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किसी व्यक्ति की तारीफ में शायरी Status Quotes

किसी व्यक्ति की तारीफ में शायरी Status Quotes इस प्यार का अंदाज़ कुछ ऐसा है, क्या बताये ये राज़ कैसा है; कौन कहता है कि आप चाँद जैसे हो, सच तो ये है कि खुद चाँद आप जैसा है। टिका बिंदी , कंगना , पायल सब ने शोर मचाया था जब उसके शोख बदन को मैंने हाथ लगाया था , यू तारीफ ना किया करो मेरी शायरी की दिल टूट जाता है मेरा जब तुम मेरे दर्द पर वाह-वाह करते हो,

किसी व्यक्ति की तारीफ में शायरी 

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चाल मस्त, नजर मस्त, अदा में मस्ती,
जब वह आते हैं लूटे हुए मैखाने को।

चाँद के दीदार को तुम छत पर क्या चले आये,
शहर में ईद की तारीख मुकम्मल हो गयी।

अदा आई, जफा आई,
गरूर आया, इताब आया,
हजारों आफतें लेकर…
हसीनों का शबाब आया।

तुम्हारी प्यार भरी निगाहों को देखकर
हमें कुछ गुमान होता है,
देखो ना मुझे इस कदर मदहोश नज़रों से
कि दिल बेईमान होता है।

पूछते हैं मुझसे की शायरी लिखते हो क्यों
लगता है जैसे आईना देखा नहीं कभी ।

मेरी निगाह-ए-शौक़ भी कुछ कम नहीं मगर,
फिर भी तेरा शबाब तेरा ही शबाब है।

नहीं बसती किसी और की सूरत अब इन आँखो में,
काश कि हमने तुझे इतने गौर से ना देखा होता।

पता नहीं लबों से लब कैसे लगा लेते हैं लोग
तुमसे नजरें भी मिल जाये तो होश नहीं रहता ।

वजह पूछोगे तो सारी उम्र गुजर जाएगी,
कहा ना अच्छे लगते हो तो बस लगते हो ।

हम भटकते रहे थे अनजान राहों में,
रात दिन काट रहे थे यूँ ही बस आहों में,
अब तमन्ना हुई है फिर से जीने की हमें,
कुछ तो बात है सनम तेरी इन निगाहों में।

लिख दूं किताबें तेरी मासूमियत पर
फिर डर लगता है…
कहीं हर कोई तेरा तलबगार ना हो जाय ।

कुछ इस अदा से आज वो पहलू-नशीं रहे,
जब तक हमारे पास रहे हम नहीं रहे।

हटा कर ज़ुल्फ़ चेहरे से
ना छत पर शाम को आना,
कहीं कोई ईद ही ना कर ले
अभी रमज़ान बाकी है।

उनको सोते हुए देखा था दमे-सुबह कभी,
क्या बताऊं जो इन आंखों ने शमां देखा था।

यह बात, यह तबस्सुम,
यह नाज, यह निगाहें,
आखिर तुम्ही बताओ
क्यों कर न तुमको चाहें।

कम से कम अपने बाल तो बाँध लिया करो ।
कमबख्त..
बेवजह मौसम बदल दिया करते हैं ।

धडकनों को कुछ तो काबू में कर ए दिल,
अभी तो पलकें झुकाई हैं
मुस्कुराना अभी बाकी है उनका।

तोहमते तो लगती रही
रोज़ नयी नयी हम पर,
मगर जो सबसे हसीन इलज़ाम था
वो तेरा नाम था ।

जैसे धुऐं के पीछे से सूरज का चमकना,
घने बादलों के पीछे से चाँद का खिलना,
पंखुडियाँ खोलकर कमल का खिलखिलाना,
वैसे घूँघट की आड से तेरा लाजवाब मुस्कुराना।

इस प्यार का अंदाज़ कुछ ऐसा है,
क्या बताये ये राज़ कैसा है;
कौन कहता है कि आप चाँद जैसे हो,
सच तो ये है कि खुद चाँद आप जैसा है।

फ़क़त इस शौक़ में पूछी हैं हज़ारों बातें..
मैं तेरा हुस्न तेरे हुस्न-ए-बयाँ तक देखूँ ।

नशीली आँखों से वो जब हमें देखते हैं,
हम घबरा कर आँखें झुका लेते हैं,
कौन मिलाये उन आँखों से आँखें,
सुना है वो आँखों से अपना बना लेते हैं।

तेरे हुस्न का दीवाना तो हर कोई होगा
लेकिन मेरे जैसी दीवानगी हर किसी में नहीं होगी।

ये तेरा हुस्न औ कमबख्त अदायें तेरी
कौन ना मर जाय,अब देख कर तुम्हें

तेरा हुस्न बयां करना नहीं मकसद था मेरा !
ज़िद कागजों ने की थी और कलम चल पड़ी !

किसी व्यक्ति की तारीफ में शायरी  2022

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तेरा हुस्न एक जवाब,मेरा इश्क एक सवाल ही सही
तेरे मिलने कि ख़ुशी नही,तुझसे दुरी का मलाल ही सही
तू न जान हाल इस दिल का,कोई बात नही
तू नही जिंदगी मे तो तेरा ख़याल ही सही

दुनिया में तेरा हुस्न मेरी जां सलामत रहे
सदियों तलक जमीं पे तेरी कयामत रहे

क्या तुझे कहूं तू है मरहबा.
तेरा हुस्न जैसे है मयकदा
मेरी मयकशी का सुरूर है,
तेरी हर नजर तेरी हर अदा_

मेरी निगाह-ए-इश्क भी
कुछ कम नही,
मगर, फिर भी
तेरा हुस्न तेरा ही हुस्न है

जिस मोड़ पे तू मिल गई
वहां एक नई राह खुल गई
तू नए किरण की बहार है
अब रात भी मेरी ढल गई

मेरा इश्क भी, तेरा हुस्न भी
गजलों में आके घुल गई
मेरी शायरी की किताब तू
कभी खो गई, कभी मिल गई

किसका चेहरा अब मैं देखूं…?
चाँद भी देखा…! फूल भी देखा…!!
बादल बिजली…! तितली जुगनूं…!!
कोई नहीं है ऐसा…! तेरा हुस्न है जैसा…!!

शरीके-ज़िंदगी तू है मेरी, मैं हूँ साजन तेरा
ख्यालों में तेरी ख़ुश्बू है चंदन सा बदन तेरा

अभी भी तेरा हुस्न डालता है मुझको हैरत में
मुझे दीवाना कर देता है जलवा जानेमन तेरा

तेरी तरफ जो नजर उठी
वो तापिशे हुस्न से जल गयी
तुझे देख सकता नहीं कोई
तेरा हुस्न खुद ही नकाब हैं

मत पूछना मेरी खुशी की इंतेहा क्या होगी उस वक़्त…
क्यूंकी उस दिन खत्म मेरे बरसो का इन्तेजार होगा.!!!

क्या हसीन वो शाम होगी, क्या हसीन उस दिन सारा जहां होगा…
लाल सुनहरे जोड़े में सजा उस दिन मेरा यार होगा.!!!

देखे जो आइना भी तो रूठकर बिखर जाये टुकड़ो में…
कुछ ऐसे सजा-सवरा उस दिन मेरी महबूब का रूप सिंगार होगा…
सादगी उसकी इतना कातिल है, उसके हुस्न का आलम यारो…
क्या होगा उस दिन जब वो गहनो से सजकर तैयार होगा.!!!

शायद फिसल जायेगे पहली बार मेरे अरमान भी उस दिन…
क्यूंकि हुस्न उसका उस दिन यारो अल्फाज़ो से परे होगा…
चाँद भी उस दिन कुछ देर बदलो में छुप जाएगा…
क्यूंकी ज़मी पर उस दिन डोली में एक और चाँद सवार होगा.!!!

हमें नहीं चाहिये ज़माने की खुशियाँ,
अगर मिल जाये मोहब्बत तुम्हारी…

आँखों में तेरी कोई करिश्मा ज़रूर है…
तू जिसको देख ले;
वो बहकता ज़रूर है…

बहुत खुबसूरत है हमारा सनम |
खुदा ऐसा चेहरा बनाता है कम ||

डूबकर तेरी झील सी गहरी आँखों में,
एक मयकश भी शायद पीना भूल जाए.

चांद रोज़ छत पर आकर इतराता बहुत था,
कल रात मैंने भी उसे तेरी तस्वीर दिखा दी.

सुबह का मतलब मेरे लिए सूरज निकलना नही,
तेरी मुस्कराहट से दिन शुरू होना है…

इश्क के फूल खिलते हैं तेरी खूबसूरत आंखों में..,
जहां देखे तू एक नजर वहां खुशबू बिखर जाए॥….

ऐसा ना हो तुझको भी दीवाना बना डाले,
तन्हाई मैं खुद अपनी तस्वीर न देखा कर …

बाँहों में ले कर उसको फिर लबो की लाली चुराई थी
उस सर्द रात में साँसे भी शोला बन कर टकराई थी

टिका बिंदी , कंगना , पायल सब ने शोर मचाया था
जब उसके शोख बदन को मैंने हाथ लगाया था ,

डूब गए थे हम दोनों उस दहकती प्यार की आग में
तोड़ दिया था हम ने कलियों को उसके प्यार के बाग़ में

तुझको देखा तो फिर किसी को नहीं देखा,
चाँद कहता रहा मैं चाँद हूँ… मैं चाँद हूँ…।

कैसी थी वो रात कुछ कह सकता नहीं मैं
चाहूँ कहना तो बयां कर सकता नहीं मैं ,

दुल्हन बन के मेरी जब वो मेरी बाँहों में आयी थी
सेज सजी थी फूलों की पर उस ने महकाई थी

घूँघट में इक चाँद था और सिर्फ तन्हाई थी
आवाज़ दिल के धड़कने की भी फिर ज़ोर से आयी थी

प्यार से जो मैंने घूँघट चाँद पर से हटाया था
प्यार का रंग भी उतरकर उसके चेहरे पर आया था

उनकी तारीफ़ क्या पूछते हो उम्र सारी गुनाहों में गुजरी
अब शरीफ बन रहे है वो ऐसे जैसे गंगा नहाये हुए है

यू तारीफ ना किया करो मेरी शायरी की
दिल टूट जाता है मेरा जब तुम मेरे दर्द पर वाह-वाह करते हो

मिल जाएँगे हमारी भी तारीफ़” करने वाले.
कोई हमारी मौत की “अफ़वाह” तो फैलाओ यारों

क्या लिखूँ तेरी सूरत – ए – तारीफ मेँ , मेरे हमदम
अल्फाज खत्म हो गये हैँ, तेरी अदाएँ देख-देख के

एक लाइन में क्या तेरी तारीफ़ लिखू
पानी भी जो देखे तुझे तो प्यासा हो जाये

ये इश्क़ बनाने वाले की मैं तारीफ करता हूं
मौत भी हो जाती है और क़ातिल भी पकड़ा नही जाता

सभी तारीफ करते हैं, मेरी शायरी की लेकिन
कभी कोई सुनता नहीं, मेरे अल्फाज़ो की सिसकियाँ.

तारीफ़ अपने आप की, करना फ़िज़ूल है,
ख़ुशबू तो ख़ुद ही बता देती है, कौन सा फ़ूल है

लोग भले ही मेरी शायरी की तारीफ न करे
खुशी दुगनी होती है जब उसे कॉपी पेस्ट में देखता हूं

तेरी तारीफ मेरी शायरी में जब हो जाएगी
चाँद की भी कदर कम हो जाएगी