किसी_को_जलाने_की_एटीट्यूड_शायरी

किसी को जलाने की एटीट्यूड शायरी | 2021

किसी को जलाने की एटीट्यूड शायरी

खून अभी वो ही है ना ही शोक बदले ना ही जूनून, सून लो फिर
से, रियासते गयी है रूतबा नही, रौब ओर खोफ आज भी वही हें |

उनको डर है कि हम उन के लिए जान नही दे सकते,
और मुझे खोफ़ है कि वो रोएंगे बहुत मुझे आज़माने के बाद !

बेवक़्त, बेवजह, बेहिसाब मुस्कुरा देता हूँ,
_आधे दुश्मनो को तो यूँ ही हरा देता हू।…

ये वादा है की हम तुझे उस मोड़ तक लायेंगे,
जहाँ हम अपना दर्द तेरी आँखों से छलका के दिखाएँगे !!

एक मैं हूँ कि…
समझा नहीँ खुद को आज तक l
एक दुनिया है कि…
न जाने मुझे क्या-क्या समझ लेती है…

रुकावटें तो जनाब..जिंदा इन्सान के हिस्से में ही आती हैं..
. वर्ना…जनाज़े के लिए तो..सब रास्ता छोड़ देते हैं..

तेरे जो अपने हैं उनमें शुमार मैं भी हूँ?
जवाब दे तू अभी बेक़रार मैं भी हूँ
तेरे ग़मों की उदासी को मैं ख़ुशी दे दूँ
तू अब तो मान ले फ़स्ल ए बहार मैं भी हूँ

कभी तो लाए सफीना तेरा इधर भी हवा
सदी से मुन्तजिर इस पार यार मैं भी हूँ
ये किसने छेड़ दिया राग दिल के ज़ख्मों का
भरी सी बज्म में अब सोगवार मैं भी हूँ

के जैसे शाम है बेताब रात की खातिर
वो शाम तू है तो फिर रात यार मैं भी हूँ
वो अपनी हिज्र का दारु है ढूँढ़ते फिरते
उसी मरज़ का भी तो इक बीमार मैं भी हूँ