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किसी के लिए कितना भी करो शायरी | Kisi Ke Liye Kitna Bhi Karo

किसी के लिए कितना भी करो शायरी |Kisi Ke Liye Kitna Bhi Karo shayari 2021

दिल दिया ऐतबार की हद थी जान दी यह मेरे प्यार की हद थी मर गए लेकिन
रही मेरी आँखें यह तो तेरे इंतज़ार की हद थी

किसी_के_लिए_कितना_भी_करो_शायरी

कुछ भी कहो लेकिन इस बात में कुछ तो दम है की किसी के लिए कितना भी करो कम है।

बोहोत खुश नसीब है वह लोग
जिनका प्यार उनकी क़दर करता है और इज़्ज़त भी…
एक बड़े नाम के पीछे जो छिपा हुआ गुमनाम चेहरा है 
खिलती हुई मुस्कान के पीछे जो छिपा हुआ दर्द है ना बस ज़िन्दगी का सच वहीं तक है।
किसी के लिए कितना भी करो शायरी
कोई नही आऐगा मेरी जिदंगी मे तुम्हारे सिवा
एक मौत ही है जिसका मैं वादा नही करता.
फ़रिश्ते ही होंगे जिनका इश्क मुकम्मल होता है
हमने तो यहाँ इंसानों को बस बर्बाद होते देखा है

दिल मेरा काबू में ना रहा ये अनजान हो गया, दिल हमारा ना जाने कब तुम्हारा हो गया, हम सोचते बस सोचते रह गए और तुमसे प्यार हो गया। 

जब जब वो मेरे पास आती है, एक महका  महका सा एहसास छोड़ जाती है, न हम कुछ बोल पत है न वो कुछ , बस दिल ही दिल प्यार का इज़हार कर जाती है!