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कहाँ हो तुम शायरी | Kaha Ho Tum Shayari

कहाँ हो तुम शायरी

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कहाँ हो तुम बिना दर्द के आँसू बहाये नही जाते, .
बिना प्यार के रिश्ते निभाए नही जाते, .
ज़िंदगी मे एक बात याद रखना, .
किसी को रुलाकर अपने सपने सजाये नही जाते….!

इक पल में दोस्त बन गए
हम कभी वह पल याद आए तो लौट आना
आप से दूर रहना नहीं चाहते हम
किस्मत अगर साथ ना दे तो लौट आना कहाँ हो तुम

लोग अक्सर दिल वालों का साथ नहीं देते
कोई अगर साथ ना दे तो लौट आना
तुम हो ना गुजर सकेंगे दिन
यह संदेश पहुंच जाए तो लौट आना कहाँ हो तुम

कहाँ हो तुम गम की नजर से देखिए, दिल के असर से देखिए है
अश्क भी एक लाल रंग,
खूने-जिगर से देखिए तैराक भी कितने यहाँ
प्यासे ही मर गए संसार की नदी में भी 

आज दिल उदास नहीं,
अहसास है तू पास नहीं. लब हस्ते हैं मेरे, झूट हैं
या सच कोई सवाल नहीं.,.,!!!
किसी ने मुझसे पूछा कि तुम कहाँ हो तुम

उसे पाने के लिए किस हद तक जा सकते हो……?
मैंने मुस्कुरा के कहा “अगर हदे पार करनी होती,
तो उसे कब का पा लिया होता कहाँ हो तुम

कहाँ हो तुम दोस्त दोस्त से खफा नहीं होता, .
प्यार प्यार से जुदा नहीं होता, .
भुला देना मेरी कुछ कमियों को, .
क्यूंकि इंसान कभी खुदा  नहीं होता

कहाँ हो तुम मेरी एक छोटी सी बात मान लो….!!
लंबा सफर है फिरसे हाथ थाम लो….!
हम तो जल गये उसकी मोहब्बत में मोमकी तरह,
अगर फिर भी वो हमें बेवफा कहे…
तो उसकी वफ़ा को सलाम.