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Top 20+ Faiz Ahmad Faiz Shayari Poetry Status Quotes

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Faiz Ahmad Faiz Shayari

Faiz Ahmad Faiz Shayari-poetry

1.Aarzoo hai tumhe door se dekhne ki;
kareeb aana bhi nahi chahte
tamana nahi hai tumhe paane ki
magar khona bhi nahi chaahte!!!

2.अपनी तो ज़िन्दगी है अजीब कहानी है,
जिस चीज़ की चाह है वो ही बेगानी है,
हँसते भी है तो दुनिया को हँसाने के लिए,
वरना दुनिया डूब जाये इन आखों में इतना पानी है

3.बुलाती है मगर जाने का नहीं
ये दुनिया है इधर जाने का नहीं मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुज़र जाने का नहीं ज़मीं भी सर पे रखनी हो तो रखो
चले हो तो ठहर जाने का नहीं सितारे नोच कर ले जाऊंगा
मैं खाली हाथ घर जाने का नहीं वबा फैली हुई है हर तरफ
अभी माहौल मर जाने का नहीं वो गर्दन नापता है नाप ले
मगर जालिम से डर जाने का नहीं

4.Aarzoo Thi Meri Ki Unka Har Din
Merey Sath Khushi Sey Nikley
Kasoor Unka Nhi Badnaseeb Hum Nikley
Ki Unki Khushi To Nhi Par Har Gam Ki Wajah Ham Nikley.

5.जिंदगी देने वाले, मरता छोड़ गये,
अपनापन जताने वाले तन्हा छोड़ गये,
जब पड़ी जरूरत हमें अपने हमसफर की,
वो जो साथ चलने वाले रास्ता मोड़ गये।

6.तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा करके
दिल के बाज़ार में बैठे हैँ ख़सारा करके आसमानो की तरफ फेक दिया है मैंने
चंद मिट्टी के चिरागों को सितारा करके एक चिन्गारी नज़र आई थी बस्ती मेँ उसे
वो अलग हट गया आँधी को इशारा करके मैं वो दरिया हूँ कि हर बूँद भंवर है जिसकी
तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके आते जाते है कई रंग मेरे चेहरे पर
लोग लेते है मज़ा जिक्र तुम्हारा करके मुन्तज़िर हूँ कि सितारों की ज़रा आँख लगे
चाँद को छत पे बुला लूँगा इशारा करके

Faiz Ahmad Faiz Shayari Poetry

7.ज़िन्दगी के लिए जान जरुरी है,
पाने के लिए अरमान ज़रूरी है,
हमारे पास चाहे हो कितना ही गम,
पर आपके चेहरे पर मुस्कान ज़रूरी है.

8.चलो! थोड़ी मुस्कुराहट बाँटते है..
थोड़ा दुख तकलीफों को डाँटते है..
क्या पता ये साँसे चोर कब तक हैं?
क्या पता ‘जिन्दगी की चरखी’ में ड़ोर कब तक हैं?

9.हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिन्दुस्तान कहते हैं जो दुनिया में सुनाई दे उसे कहते है ख़ामोशी
जो आँखों में दिखाई दे उसे तूफान कहते है जो ये दीवार का सुराख है साज़िश का हिस्सा है
मगर हम इसको अपने घर का रोशनदान कहते हैं ये ख्वाहिश दो निवालों की हमें बर्तन की हाजत क्या
फ़क़ीर अपनी हथेली को ही दस्तरख्वान कहते हैं मेरे अंदर से एक-एक करके सब कुछ हो गया रुखसत
मगर एक चीज़ बाकी है जिसे ईमान कहते हैं

10.सिर्फ खंजर ही नहीं आँखों में पानी चाहिए,
ऐ खुदा दुश्मन भी मुझको खानदानी चाहिए मैंने अपनी खुश्क आँखों से लहू छलका दिआ,
एक समन्दर कह रहा था मुझको पानी चाहिए। सिर्फ खबरों की ज़मीने देके मत बहलाइये
राजधानी दी थी हमने, राजधानी चाहिए

11.गुलाब खिलते रहे ज़िंदगी की राह् में,
हँसी चमकती रहे आप कि निगाह में.
खुशी कि लहर मिलें हर कदम पर आपको,
देता हे ये दिल दुआ बार–बार आपको.

12.गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या-क्या है
मैं आ गया हूँ बता इन्तज़ाम क्या-क्या है फक़ीर शेख कलन्दर इमाम क्या-क्या है
तुझे पता नहीं तेरा गुलाम क्या क्या है अमीर-ए-शहर के कुछ कारोबार याद आए
मैँ रात सोच रहा था हराम क्या-क्या है

13.अपनी जिंदगी के अलग असूल हैं,
यार की खातिर तो कांटे भी कबूल हैं,
हंस कर चल दूं कांच के टुकड़ों पर भी,
अगर यार कहे, यह मेरे बिछाए हुए फूल हैं.

14.उदास लम्हों की न कोई याद रखना,
तूफ़ान में भी वजूद अपना संभाल रखना,
किसी की ज़िंदगी की ख़ुशी हो तुम,
बस यही सोच तुम अपना ख्याल रखना।

Faiz Ahmad Faiz Shayari In Hindi

15.अगर खिलाफ है होने दो जान थोड़ी है,
ये सब धुँआ है कोई आसमान थोड़ी है | लगेगी आग तो आएंगे घर कई ज़द में,
यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है | हमारे मुह से जो निकले वही सदाकत है,
हमरे मुह में तुम्हारी जबान थोड़ी है | मै जानता हूँ कि दुश्मन भी कम नहीं है,
लेकिन हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है | आज शाहिबे मसनद है कल नहीं होंगे,
किरायेदार है जात्ती मकान थोड़ी है | सभी का खून है शामिल इस मिट्टी में,
किसे के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है |

16.इस दिल को किसी की आस रहती है,
निगाहों को किसी सूरत की प्यास रहती है,
तेरे बिना किसी चीज़ की कमी तो नही,
पर तेरे बेगैर जिन्दगी बड़ी उदास रहती है..

17.कागज़ की कश्ती से पार जाने की ना सोच,
चलते हुए तुफानो को हाथ में लाने की ना सोच,
दुनिया बड़ी बेदर्द है, इस से खिलवाड़ ना कर,
जहाँ तक मुनासिब हो, दिल बचाने की सोच।

18.मेरे हुजरे में नहीं और कही पर रख दो,
आसमा लाये हो ले आओ जमी पर रख दो | मैंने जिस ताक में कुछ टूटे दीए रखे हैं
चाँद तारों को भी ले जाके वही पर रख दो अब कहा ढूंढने जाओगे हमारे कातिल,
आप तो क़त्ल का इल्जाम हमी पर रख दो | हो वो जमुना का किनारा ये कोई शर्त नहीं
मिट्टी मिट्टी ही में रखनी है कही पर रख दो

19.लगे है फोन जबसे तार भी नहीं आते ,
बूढी आँखों के अब मददगार भी नहीं आते ,
गए है जबसे शहर में कमाने को लड़के ,
हमारे गाँव में त्यौहार भी नहीं आते।

20.ज़िन्दगी लहर थी आप साहिल हुए,
न जाने कैसे हम आपकी दोस्ती के काबिल हुए,
न भूलेंगे हम उस हसीं पल को,
जब आप हमारी छोटी सी ज़िन्दगी में शामिल हुए.

21.हम अपने आसुओ को चुन रहे है
सितारे किस लिए जल-भून रहे है कभी उसका तबस्सुम छू गया था
उजाले आजतक सर धुन रहे है अभी मत छेड़िये जिक्र-ए-महोब्बत
जलालुद्दीन अकबर सुन रहे है जवानिओं में जवानी को धुल करते हैं
जो लोग भूल नहीं करते, भूल करते हैं अगर अनारकली हैं सबब बगावत का
सलीम, हम तेरी शर्ते कबूल करते हैं

22.तेरे मेरे रिश्ते को क्या नाम दूँ,
यह नाम दूँ या वह नाम दूँ,
इस दुनिया की भीड़ मैं नाम हो जाते है बदनाम,
क्यों न अपने रिश्ते को बेनाम ही रहने दूँ.

23.जिस दिन बंद कर ली हमने आंखें,
कई आँखों से उस दिन आंसु बरसेंगे,
जो कहते हैं के बहुत तंग करते है हम,
वही हमारी एक शरारत को तरसेंगे.

Hindi Faiz Ahmad Faiz Shayari 

24.इश्क़ सभी को जीना सिखा देता है,
वफ़ा के नाम पर मरना सीखा देता है,
इश्क़ नहीं किया तो करके देखो,
ज़ालिम हर दर्द सहना सीखा देता है!

25.फर्क होता है खुदा और फ़क़ीर में,
फर्क होता है किस्मत और लकीर में..
अगर कुछ चाहो और न मिले तो समझ लेना..
कि कुछ और अच्छा लिखा है तक़दीर में।

26.अपनी तो ज़िन्दगी है अजीब कहानी है,
जिस चीज़ की चाह है वो ही बेगानी है,
हँसते भी है तो दुनिया को हँसाने के लिए,
वरना दुनिया डूब जाये इन आखों में इतना पानी है।

27.जिंदगी देने वाले, मरता छोड़ गये,
अपनापन जताने वाले तन्हा छोड़ गये,
जब पड़ी जरूरत हमें अपने हमसफर की,
वो जो साथ चलने वाले रास्ता मोड़ गये।

28.ज़िन्दगी के लिए जान जरुरी है,
पाने के लिए अरमान ज़रूरी है,
हमारे पास चाहे हो कितना ही गम,
पर आपके चेहरे पर मुस्कान ज़रूरी है.

29.चलो! थोड़ी मुस्कुराहट बाँटते है..
थोड़ा दुख तकलीफों को डाँटते है..
क्या पता ये साँसे चोर कब तक हैं?
क्या पता ‘जिन्दगी की चरखी’ में ड़ोर कब तक हैं?