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Dil Shayari दिल शायरी Shayari On Dil Ki Baat

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Dil Shayari In Hindi

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दिल की किताब में गुलाब उनका था रात की नींद में ख्वाब उनका था कितना प्यार करते हो जब हमने पूछा मर जायंगे तुम्हारे बिना ये जबाब उनका था.

 उन्हें चाहना हमारी कमजोरी है उनसे कह नही पाना हमारी मजबूरी है वो क्यूँ नही समझते हमारी खामोशी को क्या प्यार का इज़हार करना जरूरी है

इस दिल को अगर तेरा एहसास नही होता …. तू दूर भी रहकर यूं दिल के पास नही होता …. इस दिल ने तेरी चाहत कुछ ऐसे बसा ली है …. इक लम्हा भी तुझ बिन कुछ खास नही होता ..

उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है! जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है! दिल टूटकर बिखरता है इस कदर! जैसे कोई कांच का खिलौना चूर-चूर होता है!

मेरे दिल कि सरहद को पार न करना नाजुक है दिल मेरा वार न करना खुद से बढ़कर भरोसा है मुझे तुम पर इस भरोसे को तुम बेकार न करना

 पास आ ज़रा दिल की बात बताऊँ तुझको कैसे धड़कता है दिल की आवाज़ सुनाऊँ तुझको आकर देख ले दिल पर नाम लिखा है तेरा तूँ कहे तो दिल चीर के दिखाऊँ तुझको

 तेरे शहर के कारीगर बड़े अजीब हैं ऐ खुसूस-ए-दिल काँच की मरम्मत करते हैं पत्थर के औजारों से

आज दिल कर रहा था बच्चों की तरह रूठ ही जाऊँ पर फिर सोचा उम्र का तकाज़ा है मनायेगा कौन

तुम कभी गलतफहमी में रहते हो कभी उलझन में रहते हो इतनी जगह दी है तुमको दिल में तुम वहाँ क्यों नहीं रहते हो

छुप कर रहना है जो सब से तो ये मुश्किल क्या है तुम मेरे दिल में रहो सनम दिल की तमन्ना हो कर

 बड़ी आसानी से दिल लगाए जाते हैं पर बड़ी मुश्किल से वादे निभाए जाते हैं लेकर जाती है मोहब्बत उन राहों पर जहां पर दिये नहीं दिल जलाए जाते हैं

दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है आखिर इस दर्द की दवा क्या है, हमको उनसे है उम्मीद वफ़ा की जो जानते ही नहीं वफ़ा क्या है

आपसे रोज़ मिलने को दिल चाहता है ​कुछ सुनने सुनाने को दिल चाहता है​​ ​था आपके मनाने का अंदाज़ ऐसा​​ ​कि फिर रूठ जाने को दिल चाहता है​

Dil Shayari

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तू ही बता दिल कि तुझे समझाऊं कैसे जिसे चाहता है तू उसे नज़दीक लाऊँ कैसे यूँ तो हर तमन्ना हर एहसास है वो मेरा मगर उसको ये एहसास दिलाऊं कैसे

एक अजीब सा मंजर नजर आता है हर एक आँसू समंदर नजर आता है कहाँ रखूं मैं शीशे सा दिल अपना हर एक हाथ में पत्थर नजर आता है

 किसी के दिल में क्या छुपा है ये बस खुदा ही जानता है दिल अगर बे-नकाब होता तो सोचो कितना फसाद होता

वक्त के इस मोड़ पर ये कैसा वक्त आया है, ज़ख्म इस दिल का जुबां पर आया है, नही रोते थे हम काँटों की चुभन से आज फूलों की चुभन ने हमे रुलाया है.

मेरे दिल कि सरहद को पार न करना नाजुक है दिल मेरा वार न करना खुद से बढ़कर भरोसा है मुझे तुम पर इस भरोसे को तुम बेकार न करना

पास आ ज़रा दिल की बात बताऊँ तुझको कैसे धड़कता है दिल की आवाज़ सुनाऊँ तुझको आकर देख ले दिल पर नाम लिखा है तेरा तूँ कहे तो दिल चीर के दिखाऊँ तुझको

तेरे शहर के कारीगर बड़े अजीब हैं ऐ खुसूस-ए-दिल काँच की मरम्मत करते हैं पत्थर के औजारों से

अनजाने में यूँ ही दिल गँवा बैठे हम इस प्यार में कैसे धोखा खा बैठे हम उनसे क्या गिला करें भूल तो हमारी थी जो बिना दिलवालों से ही दिल लगा बैठे

ऐ दिल मत कर इतनी मोहब्बत किसी से इश्क में मिला दर्द तू सह नहीं पायेगा टूट कर बिखर जायेगा अपनों के हाथो से किसने तोड़ा ये भी किसी से कह नहीं पयेगा

 जीने के लिए तुम्हारी याद ही काफी है इस दिल में बस अब तुम ही बाकी हो आप तो भूल गए हो हमें अपने दिल से लेकिन हमें आज भी तुम्हारी तालाश बाकी है

वादे वफ़ा करके क्यों मुकर जाते हैं लोग किसी के दिल को क्यों तड़पाते हैं लोग अगर दिल लगाकर निभा नहीं सकते तो फिर क्यों दिल लगाते हैं लोग

इस दिल की सरहद को पार न करना नाज़ुक है मेरा दिल इस पर वार न करना खुद से बढ़कर भरोसा किया है तुम पर इस भरोसे को तुम बेकार न करना

उदास हूँ पर तुझसे नाराज़ नहीं तेरे दिल में हूँ पर तेरे पास नहीं वैसे तो सब कुछ है मेरे पास पर तेरे जैसा कोई खास नहीं

 उदास हूँ पर तुझसे नाराज़ नहीं तेरे दिल में हूँ पर तेरे पास नहीं वैसे तो सब कुछ है मेरे पास पर तेरे जैसा कोई खास नहीं

Heart Dil Shayari

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नज़र से नज़र की मुलाक़ात देखी है पियार में होते हुए तीरों की बरसात देखी है यूँ तो लाखों देखे है हमने दिल लगाने वाले पर तेरी चाहत में हमने बात कोई खास देखी है

 कुछ उलझे सवालों से डरता है दिल न जाने क्यों तन्हाई में घबराता है दिल किसी को पाना कोई बड़ी बात नहीं है पर किसी को खोने से डरता है दिल

जिस के लिए सब कुछ लुटा दिया हमने वो कहते है उनको भुला दिया हमने गए थे हम उनके आंसू पोछने इलज़ाम दे दिया की उनको रुला दिया हमने

सौ बार कहा दिल से.. चल भुल भी जा उसको । हर बार कहा दिल ने.. तुम दिल से नही कहते ।

 तेरी यादो को पसन्द आ गई है मेरी आँखों की नमी, हँसना भी चाहूँ तो रूला देती है तेरी कमी…!! ,

इक तेरी याद का आलम है कि बदलता ही नहीं वरना वक़्त आने पे हर चीज़ बदल जाती है ,

तेरी जरूरत, तेरा इंतजार और ये तन्हा आलम, थक कर मुस्कुरा देती हूँ, मैं जब रो नहीं पाती हूँ !! ,

उसे मैं याद आता तो हूँ फुरसत के लम्हों मे फराज़ ! मगर ये हकीकत है, के उसे फुरसत नहीं मिलती