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Dhasu Shayari – धांसू शायरी इन हिंदी

Dhasu Shayari – धांसू शायरी इन हिंदी Agar AApko Dhasu Shayari Statsu Quotes SMS & Messages Passand Aaye To Comment Kare Share Kare Whatsapp & Facebook Pe Thanks For Friends And Girlfriend Shayari 2021 Latest New

Dhasu Shayari

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भीगी हुई आँखों का ये मंज़र न मिलेगा
घर छोड़ के मत जाओ कहीं घर न मिलेगा i
फिर याद बहुत आयेगी ज़ुल्फ़ों की घनी
शाम जब धूप में साया कोई सर पर न मिलेगा I

कदम जब चूम ले मंज़िल तो जज़्बा मुस्कुराता है
दुआ लेकर चलो माँ की तो रस्ता मुस्कुराता है
किया नाराज़ माँ को और बच्चा हँस के ये बोला के ये माँ है
मियाँ इसका तो गुस्सा मुस्कुराता है

किताबों से निकलकर तितलियाँ ग़ज़लेँ सुनाती हैँ
टिफिन रखती है मेरी माँ तो बस्ता मुस्कुराता है
सभी रिश्ते यहाँ बर्बाद हैँ मतलब परस्ती से
मगर सदियों से माँ-बेटे का रिश्ता मुस्कुराता है।

सुबह उठते ही जब मैँ चूमता हूँ माँ की आँखों को
ख़ुदा के साथ उसका हर फरिश्ता मुस्कुराता है
मेरी माँ के बिना मेरी सभी ग़ज़लेँ अधूरी हैँ
अगर माँ लफ़्ज़ शामिल हो तो किस्सा मुस्कुराता है

वो उजला हो के मैला हो या मँहगा हो के सस्ता हो
ये माँ का सर है इस पे हर दुपट्टा मुस्कुराता है
फरिश्तों ने कहा आमाल का संदूक क्या खोलेँ दुआ लाया है
माँ की, इसका बक्सा मुस्कुराता है।

आँसू को कभी ओस का क़तरा न समझना
ऐसा तुम्हें चाहत का समुंदर न मिलेगा I
इस ख़्वाब के माहौल में बे-ख़्वाब हैं
आँखें बाज़ार में ऐसा कोई ज़ेवर न मिलेगा I
ये सोच लो अब आख़िरी साया है
मुहब्बत इस दर से उठोगे तो कोई दर न मिलेगा I’

‘ इंसां की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं ।
दो गज़ ज़मीं भी चाहिये दो गज़ कफ़न के बाद।।
लौ दे उठे हवा कभी दामन तो क्या अजब।
यूंही चराग़ उलझते रहे गर हवा के साथ ।।

बिन बात के ही रूठने की आदत है,
किसी अपने का साथ पाने की चाहत है,
आप खुश रहें, मेरा क्या है..
मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है।

धांसू शायरी इन हिंदी

हुनर मोहब्बत का हर किसी को कहाँ आता हैं…!
लोग हुस्न पर फ़िदा होकर उसे इश्क़ कह देते हैं…!

हम भी खड़े थे मोहब्बत की दहलीज पे
पर कभी लांघना गंवारा न समझा,
जब पता चला नफरत है उनको मोहब्बत करने वालों से,
तो खोने के डर से इजहार करना सही न समझा।

बस ये कहकर टाँके लगा दिये उस हकीम ने,
कि जो अंदर बिखरा है उसे खुदा भी नहीं समेट सकता!!!

ना जाने कैसे औऱ कब होगी रुखसती तुझसे,
के मै मौत से नहीं तुझसे डरता हूँ एह ज़िंदगी.!!

एक साथ चार कंधे देख कर ज़हन में आया.!
एक ही काफी था, गर जीते जी मिला होता.!!

अज़ीयत(तकलीफ) से कह दो मैं सरफिरा हूँ बहुत,
अभी अपने जज़्बात का खून पीया है मैंने.!!

हम तो उनके दिल से अपना दिल जोड़ने चले थे,
पर…उन्होंने तो दिल ही किसी और को दे दिया।

उनसे मिले हर जुर्म के बाद सिगरेट जलाई है मैने,
हा मैने दर्द को जला के उनसे प्यार बढ़ाया है।

इस जहां को बनाने वाला इतना खूबसूरत है,
जिसका शुक्र ये जहां कितनी भी कोशिश कर ले…
कभी अदा न कर सकता..।