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Bharosa Shayari – भरोसा शायरी इन हिंदी

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Bharosa shayari

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1.कैसी अजीब तुझसे यह जुदाई थी,
कि तुझे अलविदा भी ना कह सका,
तेरे भरोसा में इतना फरेब था,
कि तुझे बेवफा भी ना कह सका।

2.बेवफा कहने से पहले मेरी रग रग का खून निचोड़ लेना,
कतरे कतरे से भरोसा ना मिले तो बेशक मुझे छोड़ देना।

3.अच्छा होता जो उस से प्यार न हुआ होता,
चैन से रहते हम जो दीदार न हुआ होता,
हमे भरोसा था अपनी मंज़िल पर,
अगर उस बेवफा पर ऐतबार न हुआ होता।

4.वफा की तलाश करते रहे हम
बेवफाई में अकेले मरत�� रहे हम,
नहीं मिला दिल से चाहने वाला
खुद से ही बेबजह भरोसा करते रहे हम,

5.लुटाने को हम सब कुछ लुटा देते
मोहब्बत में उन पर मिटते रहे हम,
खुद दुखी हो कर खुश उन को रखा
तन्हाईयों में साँसें भरते रहे हम,
वो बेवफाई हम से करते ही रहे
दिल से उन पर मरते रहे हम।

6.इंसान के कंधों पर इंसान जा रहा था,
कफ़न में लिपटा अरमान जा रहा था,
जिसे भी मिली बेवफ़ाई मोहब्बत में,
भरोसा की तलाश में श्मशान जा रहा था।

7.मेरी तलाश का है जुर्म
या मेरे भरोसे का क़सूर,
जो दिल के करीब आया
वही बेवफा निकला।

8.मोहब्बत से रिहा होना ज़रूरी हो गया है,
मेरा तुझसे जुदा होना ज़रूरी हो गया है,
भरोसे के तजुर्बे करते हुए तो उम्र गुजरी,
ज़रा सा बेवफा होना ज़रूरी हो गया है।

9.रात की गहरा��� आँखों में उतर आई,
कुछ ख्वाब थे और कुछ मेरा भरोसा,
ये जो पलकों से बह रहे हैं हल्के हल्के,
कुछ तो मजबूरी थी कुछ तेरी बेवफाई।

10.मोहब्बत से भरी कोई ग़ज़ल उसे पसंद नहीं,
भरोसा के हर शेर पे वो दाद दिया करते हैं।

11.आख़िर तुम भी आइने की तरह ही निकले,
जो भी सामने आया तुम उसी के हो गए।

12.काम आ सकीं ना अपनी वफ़ाएं तो क्या करें,
उस भरोसे को भूल ना जाएं तो क्या करें।

13.काम आ सकीं ना अपनी वफ़ाएं तो क्या करें,
उस बेवफा को भूल ना जाएं तो क्या करें।

14.उसके भरोसे पे भी फ़िदा होती है जान अपनी,
अगर उस में वफ़ा होती तो क्या होता खुदा जाने।

15.सवाल आप हैं गर तो #जवाब हम भी हैं ,.,.
हैं आप ईंट तो पत्थर #जनाब हम भी हैं,.,!!!

16.मैं कभी #सिगरेट पीता नहीं मगर हर #आने वाले से पूछ लेता हूं कि माचिस है ?
बहुत कुछ है जिसे मै #फूंक #देना चाहता हूं.,.,!!

17.भाई #बोलने का हक़ मैंने #सिर्फ दोस्तों को दिया है ,., वरना #दुश्मन तो #आज भी हमें बाप के नाम से पहचानते हैं ,.,!!

18.चला था ज़िकर ज़माने की बेवफाई का,
सो आ गया है तुम्हारा ख्याल वैसे ही।

19.मेरी वफा फरेब थी मेरी वफा पे खाक डाल ।
तुझसा ही कोई बावफा तुझको मिले खुदा करे।

20.मिल ही जाएगा कोई ना कोई टूट के चाहने वाला,
अब भरोसे का शहर तो बेवफा हो नहीं सकता।

21.ज़ज़बात पे क़ाबू वो भी मोहब्बत में ,., तूफ़ान से कहते हो चुपचाप गुज़र जाओ ,.,!!