Awesome-Two-Line-Love-Shayari-in-Hindi

Awesome Two Line Love Shayari in Hindi Images, 2021

Awesome Two Line Love Shayari in Hindi

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क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे
रात भर चाँद के हमराह फ़िरा करते थे

जहाँ तन्हाईयाँ सर फोड़ के सो जाती है
इन मकानों में अजब लोग रहा करते थे

कर दिया आज ज़माने ने उन्हें भी मजबूर
कभी ये लोग मेरे दुख की दवा करते थे

Awesome Two Line Love Shayari in Hindi

लोग कहते हैं कि वक़्त के साथ सबकुछ बदल जाता है
फिर न जाने क्यों छिपकर रह जाती है ये मोहब्बत..?

….सबकी जिंदगी बदल गयी,
….एक नए सिरे में ढल गयी,

….किसी को नौकरी से फुरसत नही…
….किसी को दोस्तों की जरुरत नही….

….सारे यार गुम हो गये हैं…
…. “तू” से “तुम” और “आप” हो गये है….

….मै गुजरे पल को सोचूँ
तो, कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं….

…धीरे धीरे उम्र कट जाती है…
…जीवन यादों की पुस्तक बन जाती है,
…कभी किसी की याद बहुत तड़पाती है…
और कभी यादों के सहारे ज़िन्दगी कट जाती है …

…..किनारो पे सागर के खजाने नहीं आते,
….फिर जीवन में दोस्त पुराने नहीं आते…

…..जी लो इन पलों को हस के दोस्त,
फिर लौट के दोस्ती के जमाने नहीं आते ….

Awesome Two Line Love Shayari in Hindi 2021

मताए-दर्द-लूटी तो लुटी ये दिल भी कहीं
न डूब जाए गरीबों की उजरतों की तरह

खुदा करे कि उमीदों के हाथ पीले हों
अभी तलक तो गुज़ारी है इद्दतों की तरह

यहीं पे दफ़्न हैं मासूम चाहतें ‘राना’
हमारा दिल भी है बच्चों की तुरबतों की तरह. –

बिकती है ना ख़ुशी कहीं,
ना कहीं गम बिकता है…..

लोग गलतफहमी में हैं,
कि शायद कहीं मरहम बिकता है…..

इंसान ख्वाइशों से
बंधा हुआ एक जिद्दी परिंदा है…..

उम्मीदों से ही घायल है…..
उम्मीदों पर ही जिंदा है…..!

हूँ मैं परवाना मगर शम्मा तो हो रात तो हो
जान देने को हूँ मौजूद कोई बात तो हो

दिल तो बे-चैन है इज़्हार-ए-इरादत के लिए
किसी जानिब से कुछ इज़्हार-ए-करामात तो हो

गुफ़्तनी है दिल-ए-पुर-दर्द का क़िस्सा लेकिन
किस से कहिए कोई मुस्तफ़्सिर-ए-हालात तो हो

दास्तान-ए-ग़म-ए-दिल कौन कहे कौन सुने
बज़्म में मौक़ा-ए-इज़्हार-ए-ख़्यालात तो हो

वादे भी याद दिलाते हैं गिले भी हैं बहुत
वो दिखाई भी तो दें उन से मुलाक़ात तो हो..

उन घरों में जहाँ मिट्टी के घड़े रहते हैं
क़द में छोटे हों मगर लोग बड़े रहते हैं

जाओ जा कर किसी दरवेश की अज़मत देखो
ताज पहने हुए पैरों में पड़े रहते हैं

जो भी दौलत थी वो बच्चों के हवाले कर दी
जब तलक मैं नहीं बैठूँ ये खड़े रहते हैं

मैंने फल देख के इन्सानों को पहचाना है
जो बहुत मीठे हों अंदर से सड़े रहते हैं

तुम ये कैसे जुदा हो गये
हर तरफ़ हर जगह हो गये

अपना चेहरा न बदला गया
आईने से ख़फ़ा हो गये

जाने वाले गये भी कहाँ
चाँद सूरज घटा हो गये

बेवफ़ा तो न वो थे न हम
यूँ हुआ बस जुदा हो गये

आदमी बनना आसाँ न था
शेख़ जी आप हो गये