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अपनों ने दिया धोखा शायरी | Apno Ne Diya Dhokha Shayari

अपनों ने दिया धोखा शायरी | Apno Ne Diya Dhokha Shayari | दुनिया में न बना सके दिल का कोई आशियां चिड़ियों सा ढूंढते रहे तिनके यहां-वहां खाली पैर गरीब का घायल न हो जाए कहीं यारों हटा दो राहों से शीशे पड़े हैं जहां गम का असर कुछ यूं पड़ा मेरी निगाहों पे जैसे कि गीली होती है बरसात में मिट्टियां घटती गई हर साल में मिलने की दो घड़ी हम-तुम बड़े हो चले, बच्चों से दिन अब कहां

अपनों ने दिया धोखा शायरी

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#1 मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
इसी सियाह समंदर से नूर निकलेगा
धोखा दिया है तो साहिल पे इंतज़ार न कर
अगर वोह डूब गया है तो दूर निकलेगा

#2 कहने वालों का कुछ नहीं जाता,
सहने वाले कमाल करते हैं,
कौन ढूंढें जवाब दर्दों के,
अब अपने भी धोखा दिया करते हैं.

#3 कैसा अजीब रिश्ता है, ये दिल आज तकलीफ़ में हैं… और
तकलीफ़ धोखा देंने वाला आज भी दिल में….!!!!

#4 क्या करामत है तेरी ए खुदा
जब चलना नहीं आता था
तो लोग बार बार चलना सीखाते थे,
अब जब चलना सीख गए तो
हर कदम पर लोग गिराने कि फिराक में रहते हैं.

#5 कब उनकी पलकों से इज़हार होगा;
दिल के किसी कोने में हमारे लिए प्यार होगा;
गुज़र रही है रात उनकी याद में;
कभी तो उनको भी हमारा इंतज़ार होगा!

#6 जो भी दुख याद न था याद आया;
आज क्या जानिए क्या याद आया;

#7 याद आया था बिछड़ना तेरा;
फिर नहीं याद कि क्या याद आया;

#8 हाथ उठाए था कि दिल बैठ गया;
जाने क्या वक़्त-ए-दुआ याद आया;

#9 जिस तरह धुंध में लिपटे हुए फूल;
इक इक नक़्श तेरा याद आया;

#10 ये मोहब्बत भी है क्या रोग
जिसको भूले वो सदा याद आया।