अक्सर_लोग_भूल_जाते_है_शायरी

अक्सर लोग भूल जाते है शायरी | Aksar Log Bhul Jate Hai Shayari

अक्सर लोग भूल जाते है शायरी

देखते ही देखते, सितारेबदल जाते हैं !
हाथ में आकर, किनारे फिसल जाते हैं !

दोस्तो उलझनों का सागर है ज़िंदगी,
इसके, साँझ और सवेरे
बदल जाते हैं !

रफ़्ता रफ़्ता खिसकती है ये#ज़िंदगी,
देखते ही देखते, नज़ारे बदल जाते हैं !

बहुत मतलबी होगया है ये जमाना,
देखते ही देखते अब, नारे बदल जातेहैं !

कोई खुश भी रहे तो कैसे रहे ?
जाने क्यों वक़्त के, इशारे बदल जाते है…….

कितने मतलबी हैं हम, कि अपना ही घर देखते हैं !
गर जलता है घर किसी का, तो अपने हाथ सेकते हैं !

कितने छलों प्रपंचों से भरे हैं इस दुनिया के लोग,
#खून के रिश्तों में भी, परायों सा अक्स देखते हैं !

हम हैं कि क्या क्या सोचते हैं गलतऔरों के फेर में,
अफसोस कि खुद को भी, औरों कीनज़र से देखते हैं !

गीता का ज्ञानभी उल्टा हो गया है आजकल दोस्तो,
लोगों के शरीरज़िंदा हैं मगर, #आत्मा मरी देखते हैं!

मिट गए न जाने कितने #ख़ुदा की तलाश में,
मगर अब तो हर तरफ हम, ख़ुदा ही ख़ुदा देखतेहैं !……

कितने मतलबी हैं हम, कि अपना ही घर देखते हैं !
गर जलता है घर किसी का, तो अपने हाथ सेकते हैं !

कितने छलों प्रपंचों से भरे हैं इस दुनिया के लोग,
#खून के रिश्तों में भी, परायों सा अक्स देखते हैं !