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4 Line Shayari On Life in Hindi

4 Line Shayari On Life in Hindi कभी बनती थी तो कभी बिगड़ कर बैठ जाती थी, तेरे साथ जैसी भी थी जिंदगी जिंदगी जैसी तो थी। जिंदगी में ये हुनर भी आजमाना चाहिए, अपनों से हो जंग तो हार जाना चाहिए।

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शायद यही ज़िंदगी का इम्तिहान होता है,

हर एक शख्स किसी का गुलाम होता है,

कोई ढूढ़ता है ज़िंदगी भर मंज़िलों को,

कोई पाकर मंज़िलों को भी बेमुकाम होता है।

जिस दिन किताब-ए-इश्क की तक्मील हो गई,

रख देंगे ज़िन्दगी तेरा… बस्ता उठा के हम।

ज़िन्दगी जिसको तेरा प्यार मिला वो जाने,

हम तो नाकाम ही रहे चाहने वालों की तरह।

मायने ज़िन्दगी के बदल गये अब तो,

कई अपने मेरे बदल गये अब तो,

करते थे बात आँधियों में साथ देने की हवा चली

और सब मुकर गये अब तो।

सफर ज़िन्दगी का बहुत ही हसीन है,

सभी को किसी न किसी की तालाश है,

किसी के पास मंज़िल है तो राह नहीं,

और किसी के पास राह है तो मंज़िल नहीं।

चाहा है तुझको तेरे तगाफुल के बावजूद,

ऐ ज़िन्दगी तू भी याद करेगी कभी हमें।

अगर तुमसे कोई पूछे बताओ जिंदगी क्या है,

हथेली पर जरा सी ख़ाक रखना और उड़ा देना।

कभी बनती थी तो कभी बिगड़ कर बैठ जाती थी,

तेरे साथ जैसी भी थी जिंदगी जिंदगी जैसी तो थी।

जिंदगी में ये हुनर भी आजमाना चाहिए,

अपनों से हो जंग तो हार जाना चाहिए।

बेगाने होते लोग देखे,

अजनबी होता शहर देखा

हर इंसान को यहाँ,

मैंने खुद से ही बेखबर देखा।

रोते हुए नयन देखे,

मुस्कुराता हुआ अधर देखा,

गैरों के हाथों में मरहम,

अपनों के हाथों में खंजर देखा।

मत पूछ इस जिंदगी में,

इन आँखों ने क्या मंजर देखा,

मैंने हर इंसान को यहाँ,

बस खुद से ही बेखबर देखा।

चेहरे की हँसी से गम को भुला दो,

कम बोलो पर सब कुछ बता दो,

खुद ना रूठो पर सबको हँसा दो,

यही राज है ज़िन्दगी का…

जियो और जीना सिखा दो।

शम्मा परवाने को जलना सिखाती है,

शाम सूरज को ढलना सिखाती है,

क्यों कोसते हो पत्थरों को जबकि…

ठोकरें ही इंसान को चलना सिखाती हैं।

जिन्दगी लत है,

हर लम्हे से बेपनाह मोहब्बत है,

मुश्किल और सुकून की कशमकश में,

जिंदगी यूं ही जिये जाता हूँ…

ज़िंदादिली होती है जिन्दगी,

इश्क मे घुली होती है जिन्दगी,

तुमसे मिलने कि चाहत रखती है जिन्दगी,

लेकिन तक़दीर नही मिलने देती है जिन्दगी.

इतनी ठोकरें देने के लिए शुक्रिया ऐ ज़िन्दगी,

चलने का न सही सँभलने का हुनर तो आ गया।

धूप और छाँव कि पतली लकीर पर खड़ा हूँ,

दोनों पार यादें हैं सपने हैं उम्मीदें हैं और है बहता हुआ वक्त भी…

यह ज़िन्दगी बस सिर्फ पल दो पल है,

जिसमें न तो आज और न ही कल है,

जी लो इस ज़िंदगी का हर पल इस तरह,

जैसे बस यही ज़िन्दगी का सबसे हसीं पल है।

मेरे होठों की हँसी मेरे भाई की बदोलत है,

मेरी आँखों में खुशी मेरे भाई की बदोलत है,

मेरा भाई किसी खुदा से कम नही,

क्योकि मेरी ज़िन्दगी की सारी खुशी भाई की बदोलत है!!

खुशी में भी आँखें आँसू बहाती रही, ज़रा सी बात देर तक रूलाती रही, कोई खो के मिल गया तो कोई मिल के खो गया, ज़िंदगी हम को बस ऐसे ही आज़माती रही।

अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी,

सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ,

मिला कुछ। इतनी बदसलूकी ना कर,

ऐ जिंदगी हम कौन सा यहाँ बार बार आने वाले हैं।

जिंदगी भी तवायफ की तरह होती है,

कभी मज़बूरी में नाचती है कभी मशहूरी में ।

यूँ ही खत्म हो जायेगा जा़म की तरह जिन्दगी का सफ़र,

कड़वा ही सही एक बार तो नशे में होकर इसे पिया जाये।

ज़िंदगी को परिभाषित करना मुहाल है ।

शायद इसलिए शाइर ज़िंदगी को जितने ज़ावियों और सूरतों में देखता है,

उस को अपने तौर पर पेश करता है ।

ज़िंदगी के हुस्न की कहानी हो या उस की बद-सूरती का बयान सब को उर्दू शाइरी अपने दामन में समेट कर चलती है ।

इस का अंदाज़ा यहाँ प्रस्तुत संकलन से लगाया जा सकता है।

आराम से तनहा कट रही थी तो अच्छी थी,

जिंदगी तू कहाँ दिल की बातों में आ गयी ।

साँसे तो हम.. बस दिखाने के लिए लेते हैं,

वरना ज़िन्दगी तो.. हमारी तुम ही हो।

हर रात के चाँद पर है नूर आपसे,

हर सुबह की ओस को गुरूर है आपसे,

हम कहना तो नहीं चाहते,

पर मर जायेंगे रहकर दूर आपसे,

मेरी ज़िन्दगी में आने का शुक्रिया और,

शादी की सालगिरह का हार्दिक अभिनन्दन !!

जबसे मेरी ज़िन्दगी में,

आयी है इक Female.

भूल गया है सब कुछ

क्या Mail Box, क्या Email.

सुलग़ती ज़िन्दगी से मौत आ जाए तो बेहतर हैं,

हम से दिल के अरमानों का अब मातम नही होता।

बहाने और भी होते जो ज़िन्दगी के लिए

हम एक बार तिरी आरजू भी खो देते

क़यामत के सारे रंग चुरा के हर रंग के सारे फूल चुरा के फूलों की सारी खुसबू चुरा के खुसबू के सारे लम्हे चुरा के और इन लम्हो से भरी ज़िन्दगी की दुआ आपकी सालगिरह पर आप के नाम कर दूँ