हिम्मत_और_ज़िन्दगी_शायरी

हिम्मत और ज़िन्दगी शायरी

हिम्मत और ज़िन्दगी शायरी कमियाँ तो मुझमें भी बहुत है, पर मैं बेईमान नहीं। मैं सबको अपना मानता हूँ, सोचता फायदा या नुकसान नहीं। एक शौक है ख़ामोशी से जीने का, कोई और मुझमें गुमान नहीं। छोड़ दूँ बुरे वक़्त में दोस्तों का साथ, *वैसा तो मैं इंसान नहीं।…

हिम्मत और ज़िन्दगी शायरी

himmat-aur-zindagi-shayari

(1)औकात नही थी इस दुनिया में किसी की जो हमारी कीमत लगा सके,
लेकिन प्यार में पड गया आखिर और मुफ़्त में खुद बिक गया.

(2)करता हूँ इश्क़ तुझसे मोहब्बत ए- जुनून बनकर,
हर लम्हा बहती है तू मेरी नस नस में खून बनकर…

(3)वो दिल ना तोडता..तो यूँ आहों का ना मौसम होता
मै दूर नहीं होता…और वो मेरी निगाहों मे होता..

(4)खता किसी की नहीं..बस किस्मत मे ही नहीं था…
कि वो मेरी होती…….और मैं…उसका होता..

(5)तेरी मोहब्बत पे शक नहीं है,
तेरी वफाओं को मानता हूँ
मगर तुझे किसकी आरजू है,
मैं ये हक़ीकत भी जानता हू

(6)तूने मेरा आज देख के मुझे ठुकराया है.
हमने तो तेरा गुजरा कल देख के भी मोहब्बत की थी.