सादगी_पर_शायरी

सादगी पर शायरी

सादगी पर शायरी | चेहरे की सादगी पर शायरी | Sadgi Shayari चाँद आया है फलक पे सूरज की जगह हो गई अब ये धरती रहने की जगह भीड़ लग जाती है दरिया पे अब शामों में कहाँ ढूँढेगी ये तन्हाई बैठने की जगह ईँट पत्थर के जंगलों में भटकती चिड़िया जाने किस पेड़ पे है बाकी रहने की जगह सो रहे हैं सभी लोग इस बस्ती में जागता है कोई दर्द ही सोने की जगह

सादगी पर शायरी

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बदलते हुऐ लोगो के बारे मे
आखिर क्या कहुँ मे…..
मैने तो अपना ही प्यार किसी
और का होते देखा है….. ______

जब आप का नाम जुबान पर आता है
पता नही दिल क्यों मुस्कुराता है
तसल्ली होती है मन को कोई तो है
अपना जो हँसते हुए हर वक्त याद आता है…!!

कभी इतना मत मुस्कुराना
की नजर लग जाए जमाने की,
हर आँख मेरी तरह मोहब्बत की नही होती….!!!

सादगी पर शायरी

हौसले के तरकश में,
कोशिश का वो तीर ज़िंदा रखो..
हार जाओ चाहे जिन्दगी मे सब कुछ,
मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिन्दा रखो!

कोशिश करो की कोई हम से न रूठे !
जिन्दगी में अपनों का साथ न छूटे !
रिश्ते कोई भी हो उसे ऐसे निभाओ !
कि उस रिश्ते की डोर ज़िन्दगी भर न छूटे

कोशिश करो कि ज़िन्दगी का हर लम्हा
अच्छे से अच्छा गुजरे; क्योंकि,
जिंदगी नहीं रहती पर अच्छी यादें हमेशा जिंदा रहती हैं।

किसी को दिल मे छुपाना कोई ग़लत तो नही,
किसी को दिल मे बसाना कोई ख़ता तो नही,
ये दुनियावालो की नज़र मे बुरा हे तो क्या हुवा,
दुनियावाले भी तो इंसान हे कोई खुदा तो नही.

मज़बूरी में जब कोई जुदा होता है,
ज़रूरी नहीं कि वो बेवफ़ा होता है,
देकर वो आपकी आँखों में आँसू,
अकेले में वो आपसे ज्यादा रोता है।

चेहरे की सादगी पर शायरी

खामोशी से बिखरना आ गया है,
हमें अब खुद उजड़ना आ गया है,
किसी को बेवफा कहते नहीं हम,
हमें भी अब बदलना आ गया है,

किसी की याद में रोते नहीं हम,
हमें चुपचाप जलना आ गया है,
गुलाबों को तुम अपने पास ही रखो,
हमें कांटों पे चलना आ गया है|

किसी को तकलीफ़ देकर मुझसे
अपनी ख़ुशी की दुआ मत करना ,
लेकिन …
अगर किसी को एक पल की भी ख़ुशी देते हो तो …
अपनी तकलीफ़ की फ़िक्र मत करना !!!

​कुछ लिख नही पाते,
कुछ सुना नही पाते,​​हाल-ए-दिल
जुबान पर ला नही पाते,

​वो उतर गए है दिल की गहराइयों मे,​
वो समझ नही पाते और हम समझा नहीं पाते!!

तेरे और मेरी मोहब्बत में बस
1 फर्क होगा सनम।।
तेरी कभी अधूरी नहीं होगी ।
और मेरी कभी पूरी नहीं होगी।।

हर रात रो-रो के उसे भुलाने लगे,
आंसुओं में उस के प्यार को बहाने लगे,
ये दिल भी कितना अजीब है कि,
रोये हम तो वो और भी याद आने लगे ।