महसूस_पर_शायरी

महसूस पर शायरी | हिन्दी शायरी 2021

महसूस पर शायरी 

 

इश्क ‘महसूस’ करना भी …इबादत से कम नहीं,
ज़रा बताइये…. ‘छू कर’ खुदा को किसने देखा है….

महसूस पर शायरी | Mehsoos Shayari

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महसूस हो रही है हवा में उसकी खुशबू
लगता है मेरी याद में वो सांसे ले रहा है

सारी दुनिया की मुहब्बत से किनारा कर के
हमने रखा है फकत खुद को तुम्हारा कर के

उसके सिवा किसी और को चाहना मेरे बस में नहीं,
ये ‎दिल उसका है, ‎अपना होता तो बात और थी

उड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी है
परों की अब के नहीं हौसलों की बारी है

मैं क़तरा हो के तूफानों से जंग लड़ता हूँ
मुझे बचाना समंदर की ज़िम्मेदारी है

कोई बताये ये उसके ग़ुरूर-ए-बेजा को
वो जंग हमने लड़ी ही नहीं जो हारी है

दुआ करो कि सलामत रहे मेरी हिम्मत
ये एक चराग़ कई आँधियों पे भारी है

मैं चाहता भी यही था वो बेवफ़ा निकले
उसे समझने का कोई तो सिलसिला निकले

किताब-ए-माज़ी* के पन्ने उलट के देख ज़रा
न जाने कौन-सा पन्ना मुड़ा हुआ निकले

जो देखने में बहुत ही क़रीब लगता है
उसी के बारे में सोचो तो फ़ासला निकले